________________
रचना की। यथा न्यायसूत्र पर वात्सायन के वैशेषिक सूत्र पर प्रशस्तपाद के सांख्यसूत्र पर विज्ञानभिक्षु के योगसूत्र पर व्यास के, मीमांसा सूत्र पर शबर के तथा वेदान्त सूत्र पर शंकराचार्य के भाष्य अधिक प्राचीन एवं प्रसिद्ध है।
इस प्रकार आस्तिक दर्शनों का विशाल साहित्य निर्मित हुआ। नास्तिक दर्शनों का विकास सूत्र साहित्य से नहीं हुआ है। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि दर्शन का विकास स्थूल से आरम्भ होकर सूक्ष्म की ओर हुआ है। भारतीय दर्शन और पश्चिमी दर्शन में समानताएं और विभिन्नताएँ
प्रायः भारतीय दर्शन के बारे में यह कहा जाता है कि जहाँ एक ओर भारतीय दर्शन अध्यात्मवादी है वहीं दूसरी ओर पाश्चात्य दर्शन भौतिकवादी है। किन्तु यह अक्षरशः सत्य नहीं है क्योंकि पश्चिमी दर्शन बिल्कुल भौतिकवादी नहीं है। उसकी भी प्रमुख धारा भारतीय दर्शन की प्रमुख धारा के समान अध्यात्मवादी है।
भारतीय और पाश्चात्य दोना दर्शनों में प्रायः एक जैसे विषयों का विवेचन है। हाँ पश्चिमी-दर्शन में भारतीय दर्शन के समान पुनर्जन्म और मोक्ष के सिद्धान्त का व्यापक वर्णन नहीं है। इसका कारण पश्चिमी दर्शन के बारे में भ्रान्त धारणांए प्रसिद्ध हैं कि जहाँ से पश्चिमी दर्शन का अन्त होता है वहाँ से भारतीय दर्शन का प्रारम्भ होता है। यह तथ्य भी निर्मूल है। दोनों दर्शनों में प्रायः एक जैसे विषयों का विवेचन है। किन्तु यह भी सत्य है कि पुनर्जन्म और मोक्ष वास्तव में विशुद्ध दर्शन के विषय में प्रतिपाद्य रूप में नहीं है। अतः इनको लेकर केवल उपर्युक्त धारणा को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। किन्तु दोनों दर्शनों में पर्याप्त समानताएं होते हुए भी पर्याप्त विषमताएं भी
भारतीय दर्शन और पाश्चात्य दर्शन में मुख्य अन्तर यह है कि जहाँ भारतीय दर्शन व्यवहारिक है वहाँ दूसरी ओर पाश्चात्य दर्शन सैद्धान्तिक है। जहाँ पश्चिम में दर्शन को मानसिक व्यायाम के रूप में समझा जाता है तथा स्वयं ज्ञान प्राप्ति के लिए