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१. विष्णुसहस्रनाम भाष्य- इसमें परमात्मा के प्रत्येक नाम की युक्तियुक्त व्याख्या की गयी है।
२. सनत्सुजातीय भाष्य - धृतराष्ट्र के मोह को दूर करने के लिये सनतसुजातीय ऋषि ने जो आध्यात्मिक उपदेश दिया था वह महाभारत के उद्योगपर्व' में वर्णित है। इसे सनत्सुजातीय पर्व कहते है।
3 - ललितात्रिशर्त भाष्य
इस भाष्य में भगवती ललिता के तीन सौ नाम है। आचार्य शङ्कर, ललिता के
अनन्य उपासक थे ।
४. माण्डूक्य कारिक भाष्य
गौड़पादाचार्य ने माण्डूक्य उपनिषद् पर कारिकाएं लिखी है और उन्हीं के ऊपर आचार्य शंकर ने भाष्य की रचना की ।
स्त्रोत ग्रन्थ
आचार्य शङ्कर परमार्थतः अद्वैतवादी थे किन्तु व्यवहार क्षेत्र में देवी-देवताओं, तीर्थो, पवित्रनदियों की उपासना और आराधना की सार्थकता को भलीभांति समझते थे । वे मानते थे कि 'सगुण ब्रह्म' की उपासना से ही निगुण क्षेत्र में प्रवेश होता है लोक संग्रह के निमित्त आचार्य स्वयं सगुण ब्रह्म की उपासना करते थे। उन्होंने शिव, विष्णु, गणेश, शक्ति आदि देवी-देवताओं की भावपूर्ण स्तुतियों की रचना की है । शङ्कर के नाम से सम्बन्धित स्त्रोत मुख्य है
१. गणेश स्तोत्र
२. शिवस्तोत्र
३. देवी स्तोत्र
४. विष्णुस्तोत्र
७. साधारण स्तोत्र ।
महाभारत- उद्योग पर्व अध्याय ४२ से ४६ तक ।
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५. युगल देवता
६. नदीतीर्थ विषयक स्तोत्र