________________
६. आचार्य चरित (केरलीय)। ७. शङ्कर अभ्युदय- राजचूड़ामणिदीक्षित (श्री वाणी विलास प्रेस श्री रंगम में मुद्रित)। ८. शङ्कर विजयविलास काव्य- शङ्कर देशिकेन्द्र । ६. शङ्कर विजय कथा। १०. शङ्कराचार्य चरित। ११. शङ्कराचार्य अवतार कथा- आनन्दतीर्थ। १२. शङ्कर विलास चम्पू- जगन्नाथ । १३. शङ्कराभ्युदय काव्य- रामकृष्ण । १४.शङ्करदिग्विजयसार- ब्रजराज । १५.प्रचीन शंकर विजय- मूकशङ्कर (कामकोटि के १८वें अध्यक्ष)। १६. ब्राह्मशङ्कर विजय- सर्वज्ञ चित्सुज १७.शङ्कराचार्योत्पत्ति १८.गुरुवंश काव्य- (लक्षमणचार्यकृत, मुद्रितश्रीरङ्गम्) आचार्य शङ्कर का व्यक्तित्त्व
आचार्य शङ्कर बड़े भारी मातृभक्त थे। माता के लिये भी यदि इस संसार में कोई स्नेह का आधार था तो वह थे स्वयं आचार्य शङ्कर। पांच वर्ष की अवस्था में ही यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हुआ तत्पश्चात वेदाध्ययन किये। ये श्रुति-स्मृति प्रतिपादित सन्मार्ग के प्रवर्तक और संरक्षक आचार्य हैं। इसलिये उनको श्रुति-स्मृति और पुराणों का आलय कहा गया है- 'श्रुतिस्मृतिपुराणानामालयं करुणालयम' आचार्य शङ्कर का दर्शन निःसन्देह श्रुतियों, स्मृतियों तथा पुराणों का निचोड़ है।
वेदाध्ययन के बाद ही अचार्य को वैराग्य उत्पन्न हो गया और नर्मदा नदी के तट पर गुरु गोविन्द भगवत्पाद से दीक्षा लिये जो आचार्य गौड़पाद के शिष्य थे।
244