SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 67
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ५२ श्री जैन पूजा-पाठ संग्रह महा सुख होय, देखे नाथ परम सुख होय ॥ पांचों मेरु सी जिन धाम, सव प्रतिमाको करों प्रणाम । महा सुख होय. देखे नाथ परम सुख होय ॥ २ ॥ ह्रीं पंचमेसंबंध अस्सी जिनचैत्यालयस्थजिनविस्त्रेभ्यो अनिर्वपामीति स्वाहा ||२|| नंदीवर द्वीपका यह अरघ कियो निज हेत तुमको अरपत हों, द्यानत कीनों शिव खेत भूमि समरपतु हों ॥ नंदीश्वर श्रीजिनधाम वावन पुंज करें । वसु दिन प्रतिमा अभिराम आनंद भाव घरों ॥ ३ ॥ ह्रीं नंदीवर द्वीपे पूर्वपश्चिमोत्तरदक्षिगं द्विपंचाशज्जिनालयम्थजिनप्रतिमाभ्यां अनपदा अध्य निर्वपामीति つ दशलक्षण धर्मका अघ आठों द्रव्य संवार, द्यानत अधिक उछाह सों । भवताप निवार, दशलक्षण पूजों सदा ॥ ४ ॥
SR No.010003
Book TitleJain Pooja Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahavir Prakash Jain Thekedar Delhi
PublisherMahavir Prakash Jain Thekedar Dehli
Publication Year
Total Pages359
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size13 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy