SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 271
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २५६ श्री जैन पूजा-पाठ मंग्रह। घत्ता। जय आदि सु ब्रह्मा, त्रिभुवन ब्रह्मा, ब्रह्माम्बात्म म्वरूप पर । जय बोध सु ब्रह्मा, पंच सु ब्रह्मा, ब्रह्म सुमति जलधि निकर । ओं ह्रीं श्रीआदि परमदेवाय जयमाला नि, शादृल विक्रीडिन । देवोऽनेक भवार्जितो गत महा पापः प्रदीपानलः । देवः मिद्धवध विशाल हृदयालंकार हागेपम ।। देवोष्टादश दोष सिंधुर घटा दुर्भद पंचाननी । भव्यानांविदधातु वांछित फलं श्री आदिनाथो जिनः ।। श्लोक । लक्ष्मीचंद्रगुरु तो मूलसंघ विदाग्रणी । पट्टाभयचंद्रो देवो दयानंदि विदांवरः ॥ रत्नकीर्ति कुमुदेंदु सुमतिः सागरोदितः । भक्कामर महास्तोत्र पूजा चक्री गुणाधिका ॥ इति श्री मानतुङ्गाचार्य विरचिन भक्तामर नात्र पृजा ममाता !
SR No.010003
Book TitleJain Pooja Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahavir Prakash Jain Thekedar Delhi
PublisherMahavir Prakash Jain Thekedar Dehli
Publication Year
Total Pages359
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Ritual_text, & Ritual
File Size13 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy