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________________ अणुत्तरोववाइ सुत्त तए णं से धण्णे अणगारे अदीणे अविमणे अकलुसे अविसादी अपरितंतजोगी जयणघडणजोगचरित्ते अहापज्जत्तं समुदाणं पडिगाहेइ । पडिगाहित्ता काकंदीओ णयरीओ पडिणिक्खमइ पडिणिक्खमित्ता जेणेव समणे भगवं महावीरे तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता समणस्स भगवओ महावीरस्स अदूरसामंते गमणागमणाए पडिक्कमइ एसणमणेसणं आलोएड, आलोएत्ता भत्तपाणं पडिदंसेइ । तए णं से धण्णे अणगारे समणेणं भगवया महावीरेणं अब्भणुण्णाए समाणे अमुच्छिए अगिद्धे अगढिए अणज्झोववण्णे बिलमिव पण्णगभूएणं अप्पाणेणं आहारं आहारेइ आहारित्ता संजमेण तवसा अप्पाणं भावेमाणे विहरइ । तए णं समणे भगवं महावीरे अण्णया कयाइ काकंदीओ णगरीओ सहसंबवणाओ उज्जाणाओ पडिणिक्खमइ । पडिणिक्खमित्ता बहिया जणवय विहारं विहरइ । तए णं से धण्णे अणगारे समणस्स भगवओ महारीरस्स तहारूवाणं थेराणं अंतिए सामाइयमाइयाई एक्कारस अंगाई अहिज्जइ । अहिज्जित्ता संजमेणं तवसा अप्पाणं भावेमाणे विहरइ । तए णं से धण्णे अणगारे तेणं उरालेणं विउलेण पयत्तेणं पग्गहिएणं कल्लाणेणं सिवेणं धण्णेणं मंगल्लेणंसस्सिरीएणं उदग्गेणं उदत्तेणं उत्तमेणं उदारेणं महाणुभागेणं तवोकम्मेणं सुक्के लुक्खे णिम्मसे अद्विचम्मावणद्धे किडिकिडियाभूए किसे धमणिसंतए जाए यावि होत्था, जीवंजीवेणं गच्छड़, जीवंजीवेण चिट्ठइ, भासं भासित्ता वि गिलाइ, भासं भासमाणे गिलाइ, भासिस्सामीति गिलायइ । से जहाणामए कट्ठसगडिया इ वा पत्तसगडिया इवा पत्त तिल भंडग सगडिया इ वा एरंडकट्ठसगडिया इ वा इंगालसगडिया इ वा उण्हे दिण्णा सुक्का समाणी ससदं गच्छइ, ससई चिट्ठइ, एवामेव धण्णे वि अणगारे ससई गच्छइ, ससई चिट्ठइ, उवचिए तवेणं, अवचिए मंस-सोणिएणं, हुयासणे विव भासरासि पडिच्छण्णे, तवेणं, तेएणं, तव-तेयसिरीए अईव अईव उवसोभेमाणे उवसोभेमाणे चिट्ठइ । धण्णस्स णं अणगारस्स पायाणं अयमेयारूवे तवरूवलावण्णे होत्था- से जहाणामए सक्कछल्ली इ वा कद्वपाउया इ वा जरग्ग ओवाहणा इवा, एवामेव धण्णस्स अणगारस्स पाया सुक्का लुक्खा णिम्मंसा अद्विचम्मछिरत्ताए पण्णायंति, णो चेव णं मंससोणियत्ताए । धण्णस्स णं अणगारस्स पायंगुलियाणं अयमेयारूवे तवरूवलावण्णे होत्था- से जहाणामए कलसंगलिया इ वा मग्गसंगलिया इ वा माससंगलिया इ वा, तरुणिया छिण्णा, उण्हे दिण्णा, सक्का समाणी मिलायमाणी चिट्ठइ, एवामेव धण्णस्स पायंगलियाओ सक्काओ लुक्खाओ णिम्मंसाओ अट्ठिचम्मछिरत्ताए पण्णायंति, णो चेव णं मंस सोणियत्ताए | धण्णस्स णं अणगारस्स जंघाणं अयमेयारूवे तवरूवलावण्णे होत्था-से जहानामए काकजंघा इ वा, कंक जंघा इ वा, ढेणियालियाजंघा इ वा एवामेव धण्णस्स अणगारस्स जंघाओ सुक्काओ लुक्खाओ णिम्मंसाओ अट्ठिचम्मछिरत्ताए पण्णायंति, णो चेव णं मंस सोणियत्ताए । 10
SR No.009909
Book TitleAgam 09 Ang 09 Anuttaropapatik Sutra Mool Sthanakvasi
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorDevardhigani Kshamashaman
PublisherGlobal Jain Agam Mission
Publication Year2012
Total Pages21
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_anuttaropapatikdasha
File Size4 MB
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