SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 68
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ५४ . विश्वलोचनकोशः- [गान्तवर्गे निषङ्गो बाणधौ सङ्गे निसर्गः शीलसर्गयोः । नीलङ्गः कृमिकीटे स्याद् भंभराल्यामुशीरके ॥ ४४ ॥ पतङ्गः शलभे सूर्ये खगे शाल्यन्तरेऽपि च । रसे पतङ्गे पत्राङ्गं रक्तचन्दनभूर्जयोः ॥ ४५ ॥ पद्मके चाथ सर्पेऽपि पद्मकाष्ठेऽपि पन्नगः। परागः पुष्परजसि स्लानीयादौ रजस्यपि ॥ ४६॥ विख्यातावुपरागेऽपि चन्दने पर्वतान्तरे । पुन्नागः पुरुषश्रेष्ठे वृक्षभेदे सितोत्पले ॥ ४७ ॥ जातीफलेऽपि पुन्नागः पाण्डुनागे च दृश्यते । प्रयागस्तीर्थभेदे स्याद्यज्ञे वाहे विडोजसि ॥ ४८ ॥ प्रयोगः कार्मणे पुंसि प्रयुक्तौ च निदर्शने । प्रियङ्गः फलिनीकराजिकापिप्पलीष्वियम् ॥ ४९ ॥ निषंग-तरकस, संग, (पुं०) पुन्नाग-पुरुषोमें श्रेष्ठ, वृक्षभेद, सफेदनिसर्ग-स्वभाव, सर्ग (रचना) (पुं०)! कमल, ॥ ४७ ।। जायफल, पुन्ना. नीलंगु-छोटाकीड़ा, मक्षिका, खस, गवृक्ष, सफेद हस्ती तथा सर्प (पुं०)॥ ४४ ॥ (पुं०) पतङ्ग-शलभ-टीडी सूर्य, पक्षी, प्रयाग-प्रयाग नाम तीर्थ, यज्ञ, अश्व, शालिभेद, रस, पतंग काष्ट, इन्द्र, (पुं० ) ॥ ४८ ॥ पत्रांग-रक्तचंदन, भोजपत्र, (न०)। प्रयोग-औषधियोंके योगसे उच्चाटन ॥ ४५ ॥ आदिकर्म, युक्त करना, दिखाना, पन्नग-कूट औषधि, सर्प, पद्माख, (पुं०) (पुं०) पराग-पुष्पकी रज, स्नानमें लगानेकी प्रियंगु-प्रियंगु-वृक्ष या वाघांटी, मालरज, ॥ ४६॥ विख्याति, ग्रहण, कांगनी, राई, पीपल, (पुं०) चन्दन, पर्वतभेद, (पुं०) "Aho Shrutgyanam"
SR No.009534
Book TitleVishwalochana Kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNandlal Sharma
PublisherBalkrishna Ramchandra Gahenakr
Publication Year1912
Total Pages436
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Dictionary
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy