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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ( २३३ ) चतुर्थ विषय विचार. जिन प्रतिमानुं पूजन करखुं. जिन प्रतिमामां जिनेश्वरनो आरोप करी मानतां पूजतां समकितनी पुष्टि अने निर्जरानुं कारण जिन प्रतिमा थायछे. शिष्य-- श्री जिन प्रतिमानुं कथन सूत्रमां छे के नहि ? सुगुरु- हा जिन प्रतिमानुं कथन प्रभुना पवित्र सूत्रोमां छे. शिष्य हे सुगुरुजी, कृपा करीने सूत्रनो एक पाठ कहा के जेथी • जिन प्रतिमानी साबीती थायः सुगुरु हे भव्य सांभळ - मूत्रपाठः तेणं कालेणं, तेणं समएणं, जावतुंगीयाए नयरीए, बहवे समणो वासगा परिवसंति, संखे, सयगे, सिलप्पवाले, रिसदत्ते, दमगे, पोखली, तिविष्ठ, सुपयडे, भाणुदत्ते, सामिले, नरवम्मे, आणंदा, इणोअजे अन्नध्य परिवसंति से अट्ठा, दित्ता, छिन्न विपुल वाहणा, जाव लध्धठा, गहिअठ्ठा, अठमी, चाउहिसी, पुन मासिणी, सुपडिपुत्रं पोसहं पालेमाणा, निग्गंथाणं निग्गंथीणं, फासुएसणिज्जेणं, असण, पाण, खाइम, साइमेणं, जाव पडिला माणा, चेइआलएसु तिसं गंध पुप्फ वथ्याइएहिं अ चणं कुणमाणा जावविहरंति, सेतेणठेणं गोयमा, जेजिण पडिमं पूएइ, सोसम्महिठी अन्नोपुणमिडिठि, मिच्छादिठिस्स नोनाणं, नोचरणं, नोमोरूख इत्ति सम्मदृिठिस्स नाणं, चरणं, मोरुख, इतिसेतेणठेणं गोयमा, अवस्सजिणपडिमाण गधपुष्पवन्याइएहिं पूयाकायच्वा - श्रीपंचकल्प सूत्रे पूजालापक. भावार्थ - तुंगीया नगरीमा रहेनारा सूत्रोक्त बार श्रावको पोपधव्रतनुं आठम चउदस पूर्णिमा अमावाश्याए आराधत करता हता, पोषधपारीने साधु साध्वीओने निरवय आहार पाणी वहोरावता हता. अने चैत्यालयमां न प्रतिमानी पुष्पादिकयी पूजा करता, For Private And Personal Use Only
SR No.008627
Book TitleParmatma Darshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBuddhisagar
PublisherAdhyatma Gyan Prasarak Mandal
Publication Year1910
Total Pages432
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size21 MB
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