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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir तरतमयोगे दोषी दुनिया, करशो तेवू भरशोरे; निन्दक जन चंडाल समो छे, निन्दाने परिहरशोरे. कर्मा. २ पोतानामा दोष घणा छ, तेने कोई न पेखेरे; परना चांदा खोळे पापी, सद्गुण दृष्टि उवेखेरे. __ कर्मा. ३ निन्दकनी दृष्टि छे अवळी, परने आळ चढावरे; पोते सारो परने खोटो, कहेवामां ते फावेरे. त्रियोगे निन्दक जन पापी, परतुं भुंडं धारेरे; बुद्धिसागर सद्गुण दृष्टि, धारी दोष निवारेरे. कर्मा.५ कर्मा.. एक स्वप्न. राग-प्रभात. खम समी आ दुनियादारी, समजो नरने नारीरे; बाजीगर बाजी सम दुनिया, सुख नहि तलभारीरे. स्वम. ? जन्म्या तेने जावु अन्ते, माया सर्व विसारीरे; चेत चेत चेतनजी मनमां, मायामां दुःख भारीरे, स्वम. २ हाजी हा सहु स्वार्थतणी छे, मोहे मारामारीरे; स्वारथनुं सगपण जगमांहि, निश्चय देख विचारीरे. स्वम ३ इन्द्र चन्द्र नागेन्द्र चवेछे, राणा रंक विहारीरे; अमर रहे नहि कोई आ जगमा, फुले शुं संसारीरे. स्वप्न. ४ ज्ञान ध्यानयी अन्तर शोधो, आतम सुखनी क्यारीरे; बुद्धिसागर धर्मि जननी, हुं जाउ बलिहारीरे. स्वप्न. ५ For Private And Personal Use Only
SR No.008539
Book TitleBhajanpad Sangraha Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBuddhisagar
PublisherAdhyatma Gyan Prasarak Mandal
Publication Year1909
Total Pages308
LanguageGujarati, Sanskrit
ClassificationBook_Gujarati & Worship
File Size12 MB
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