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________________ २७ ७-८ श्री वेधवास्तु प्रभाकर अनुक्रमणिका विषय श्लोक पत्र विषय श्लोक पत्र ग्रंथ संपादकको अभिनंदन-पत्रिका १ १ तारङ्गाका प्रासाद तल चित्र १४ स्तुति पीठहीन, स्थापत्यहीन, जंधाहीन, टीकाकारका परिचय शिखरहीन २६-२७ १५ भूमि परीक्षा अतिदीर्घ, टुका, स्कंधहीन, विना त्याज्यभूमि बंधका, सांधचाला न हो मस्तक ऋतु अनुसारभूमि ९ ६ स्थूल, कम नीमवाला ये पांच दिग्मुढका नेष्टफल और दिग्मुढका प्रकारका दोष २८-२९ १५ दोष कहां न लगतो हे १०-१२ ७ दिग्मुर, नछंद. मस्तकभारी, आनहीन शिलारोपणके लिये नीम कहां तक ए चार प्रकारका दोष ३० १६ गाइना और शल्यशोधन १३-१४ महापीठ. कामदपीठ, कर्णपीठका गणितके तीन या चार अङ्ग मीलाना रेखाचित्र प्रतोल्या स्वरुपका रेखाचित्र १५ ९ मानहीन, अधिक यमचुलीवेध देवमंदिरसे कीस दिशामें लक्षण ११-१२ १७ मकान बनाना १६ १० जगतीचोकी मंडप और गर्भ गृहका नाभिवेध और वो कहां दोष न भूमितल केसे रखना १ . १७ वेध-वेध्यका अंतरसे दोष शिखर रेखागका महामर्म ३४ १७ छंदभेद, जातीभेद, पदहोन, एकीन लगे २०-२१ १२ स्तंभ, मानसे दीर्घहस्व, वक्र, प्रासादमें सात दफा वास्तुपूजन हीनमान ३५-३७ १८-१९ करना प्रासादवेध प्रासाद या मंडपोंका सम विषमतल, विभक्ति अनुसार तल शिखर स्तंभ, पट्टादि, सम विषमका बनाना २. १३ दोष केसे न हो ? ३८ १९ हीनमान, द्वारहीन, कौलीहीन, अपवाद | खंड में एकस्तंभ न मुफनो मूलग स्तंभ-स्तंभन्यासहीन २४-२५ १३ । दबाना नहि ३९ २० लगे
SR No.008436
Book TitleVedhvastu Prabhakara
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPrabhashankar Oghadbhai Sompura
PublisherBalwantrai Sompura
Publication Year1965
Total Pages194
LanguageGujarati, Hindi, Sanskrit
ClassificationBook_Gujarati & Art
File Size5 MB
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