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________________ कुलभूषण मुनि का उपसर्ग दूर किया तथा दण्डक वन में कर्णरवा नदी के किनारे सुगुप्ति तथा गुप्ति नाम | के दो चारण ऋद्धिधारी मुनियों को आहारदान देकर पञ्चाश्चर्य प्राप्त किये । वन में एक गिद्ध पक्षी इन्हें बहुत प्रिय रहा। इन्होंने उसका नाम जटायु रखा। लक्ष्मण ने वन में सूर्यहास खड़ग प्राप्त की तथा उसकी परीक्षा के लिए उसने उसे बांसों के झुरमुटे पर चलाया, जिससे बांसों के बीच इसी खड़ग की साधना में रत शम्बूक मारा गया। शम्बूक के मरने से उसका पिता खरदूषण लक्ष्मण से युद्ध करने आया। खरदूषण ने अपने साले रावण को भी इस घटना की खबर दी। रावण उसकी सहायता के लिए आया सो बीच में सीता को देख उस पर मोहित हो उठा। उस समय उसने अवलोकिनी विद्या के द्वारा सीता के हरण करने का वास्तविक उपाय जान लिया तथा राम, लक्ष्मण और उनके कुल के नाम भी उसे ज्ञात हो गए। सीता का हरण तो हुआ ही था, इसमें कोई विचार भेद नहीं है; किन्तु उनके अपहरण की प्रक्रिया में दो मत प्रचलित हैं। एक तो यह कि जब लक्ष्मण और खरदूषण के बीच युद्ध हो रहा था तब रावण ने सिंहनाद कर बार-बार "हे राम! हे राम!! इसप्रकार उच्चारण किया।" उस सिंहनाद को सुनकर राम ने समझा कि यह सिंहनाद लक्ष्मण ने ही किया है। वश फिर क्या था, उन्होंने व्याकुल होकर सीता से कहा कि तुम थोड़ी देर यहीं ठहरो । लक्ष्मण संकट में है, मैं उसका सहयोग कर अभी आता हूँ। इसप्रकार राम सीता को जटायु पक्षी के संरक्षण में अकेला छोड़कर चले गये। राम के जाते ही रावण सीता का अपहरण करके ले गया।" दूसरा मत यह है कि "रावण ने शूर्पनखा के सहयोग से सीता की तत्काल परिस्थिति जानकर रावण मारीच को लेकर पुष्पक विमान से चित्रकूट के वन में जा पहुँचा। रावण की आज्ञा से मारीच स्वर्ण वर्ण और श्रेष्ठ मणियों से सुसज्जित चित्ताकर्षक हिरण का रूप बनाकर सीता के सामने प्रगट हुआ। सीता उसकी ओर आकर्षित हुई उसने राम से हिरण को पकड़कर लाने को कहा । राम हिरण को पकड़ने गये। इसी बीच राम का रूप धरकर रावण ने छल से सीता का अपहरण कर लिया।" घटना जो भी हो; पर सीता का हरण रावण द्वारा हुआ था, यह परमसत्य है। 8 FNFFFFFFFF २५
SR No.008375
Book TitleSalaka Purush Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanchand Bharilla
PublisherTodarmal Granthamala Jaipur
Publication Year2003
Total Pages384
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size1 MB
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