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________________ प्रमेयचन्द्रिका टीका श०२० उ०५ सू०१ पुदलस्य वर्णादिमत्वनिरूपणम् ५७१ कृष्णः, एको नील स्तृतीयो लोहितः, एवमेको भङ्गः १ । 'सिय कालए य नीलए य हालिए य' स्यात् कालश्च नीलश्व पीतश्च त्रिमदेशिक स्कन्धस्यैकपदेशः कालो द्वितीयः प्रदेशो नीळ स्तृतीयः प्रदेशः पीत इत्येवं द्वितीयो मङ्गः २ 'सिय कालए य नीलए य सुकिल्लए य' स्यात्कालश्च नीलश्च शुक्लश्व एकोंऽशः कालो द्वितीयः प्रदेश नीलस्तृतीयः प्रदेशः शुक्ल इत्येवं तृतीयो भङ्गो भवति ३, 'सिय कालए य लोहियए य हालिदए य' स्यात् कालश्व लोहितश्च पीतश्व त्रिप्रदेशिकस्कन्धस्यैकः प्रदेशः कालो द्वितीयो लोहित स्तृतीयः पीतः, एवं रूपेग चतुर्थो भङ्गो भवति ४ । 'सिय कालए य लोहियए य सुकिल्लए य' स्यात् कालश्च लोहितश्च शुक्लश्च सकता है एक दूसरा प्रदेश नीला भी होसकता है, और तीसरा प्रदेश लाल भी हो सकता है ऐसा यह पहला भंग हैं, दूसरा भंग 'सिय कालए य, नीलए य हालिदए य' ऐसा है उसका एक प्रदेश काला, दूसरा प्रदेश नीला और तीसरा प्रदेश पीला भी हो सकता है तीसरा भग - 'सिय कालए य नीलए य सुक्किलए य' ऐसा है उसका एक प्रदेश काला, दूसरा प्रदेश नील, और तीसरा प्रदेश शुक्ल भी हो सकता है ३ सिय कालए य, लोहियए य हालिए य ४' यह चतुर्थ भंग है उसका एक प्रदेश काला भी हो सकता है, दूसरा प्रदेश लाल भी हो सकता है और तीसरा प्रदेश पीला भी हो सकता है ४ पांचवां भंग 'सिय कालए , लोहियए य, सुकिल्लए य' ऐसा है उस त्रिप्रदेशिक स्कन्ध का एक देश काला भी हो सकता है दूसरा प्रदेश लाल भी हो सकता है और तीसरा તેના એક પ્રદેશ કાળા વણુ વાળા પણ હાય છે. અને બીજો એક પ્રદેશ નીલ વણુ વાળા પણ હાઈ શકે છે. અને ત્રીજો પ્રદેશ લાલ પણ હાઈ શકે છે. આ પ્રમાણેના या प्रथम लौंग छे. मीले लौंग या प्रमाणे छे.- 'सिय कालए य नीलए य हालिए य' તેના એક પ્રદેશ કાળા વણુ વાળા પશુ હોઈ શકે છે. અને બીજો પ્રદેશ નીલ વઘુ વાળા હાય છે. અને ત્રીજે પ્રદેશ પીળા વણુ વાળા પણ હોઈ શકે છે.ર્ त्रीले लौंग 'सिय कालएय, नीलए य, सुक्किल्लए य' मे प्रभा छे. तेना પ્રદેશ કાળા વણુ વાળે અને બીજો પ્રદેશ નીલ વધુ વાળે ત્રીજો પ્રદેશ શ્વેત वर्षावाणी पशु होई शडे छे. 'लिय कालए य, लोहियए य, हालिइए २४' આ પ્રમાણેના આ ૪ ચાથા ભંગ અને છે. તેના એક પ્રદેશ કાળા પશુ હાઇ શકે છે. બીજા એક પ્રદેશ લાલ પણ હોઈ શકે છે. અને ત્રીજો પ્રદેશ थी। पशु हो शछे ४ पायो लौंग 'सिय कालए य, लोहियए य, सुक्कि ल्लए य' से प्रभारी त्रिपदेशी धनो मे देश अजा वर्षावाणी पशु होई શકે છે, અને ખીજે એક પ્રદેશ લાલ વધુ વાળા પણ હોઈ શકે છે, શ્રી ભગવતી સૂત્ર : ૧૩
SR No.006327
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Part 13 Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1969
Total Pages970
LanguageSanskrit, Hindi, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_bhagwati
File Size58 MB
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