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समन्वय-दिशा
'भारत की सांस्कृतिक एकता'कृति के इस तृतीय खण्ड में जैन व वैदिक धर्म के ग्रन्थो/ शास्त्रों में निरूपित धर्म-तत्त्व में परस्सपर कितनी समानता है- इसका दिग्दर्शन कराया जा रहा है। इस में धर्म, आत्मा, अहिंसा, सत्य, सत्संग, साधु, ब्राह्मण, कर्म, बन्ध, मुक्ति आदि विविध तत्त्वों को चयनित कर, उन पर दोनों धर्मों के विचार-चिन्तन को प्रस्तुत किया गया है।
____ पाठक स्वयं अनुभव करेंगे- भेद में अभेद, अनेकता में एकता तथा विविधता में एकस्वरता भी मुखरित