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॥ थांभ का गीत ॥ (तर्ज-रंगायजो नेमीश्वर चुम्दगी को ।) पेलो तो थांभ रतना जडियोजी, ऊपर कलश सुजान के ॥ थांभ सुहावनोमी ॥१॥ चार तीर माहें रेवमोजी, थांभ जैसो मजबूत के ॥थांभ सुहावनोजी॥२॥ डिगाया डिगजो मतीजी, धर्मसेवा में भरपूर के ॥ थांभ सुहावनोजी ॥३॥ कंकण बंधन शुभ कह्यो, जी डोरो है लाल सुरंग के ॥ यांभ सुहावनोजी ॥४॥ तोडिया तो टूटे नहीं जी, इम राखजो प्रेम की प्रीत तो ॥ थांभ सुहावनोजी ॥५॥ लाख री बोंठी लक्ष राखजोजी, संसार कुटुम्ब रे मांय के ॥ शांभ सुहावनोमी ॥६॥ लोढारी बीठी ज्यूं मजबूत रहियोजी, तो निभेला संसार के ॥ थांभ सुहावनोजी ॥७॥ दोइ बातां में नहीं सेठी रहोजी, होवेला कौडी सम इज्जत ॥ थांभ सुहावनोजी ॥८॥ बना-बनी शिक्षा हृदय धारजो जी, कांकण डोरा रो यही उपदेश के ॥ थांभ सुहावनोजी ॥९॥
॥ तेल चढाते वक्त गाने का गीत ॥ (तर्ज-पन्नालालजी पूछे बालमिया, थारे चून्दड़ चीगट किम रे हुई। )
पिताजी पूछे माताजी ने, थारे चंदड चीगट किम रे हुई । बालक बनडा ने तेल चढावतडा॥
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