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34. स्थानांगसूत्र स्थान, 9 35. भगवद्गीता 18/17 36. धम्मपद, 249 37. सूत्रकृतांग, द्वितीय श्रुतस्कन्ध, आद्रकसंवाद 2/6 38. सागरमल जैन, जैन कर्मसिद्धान्त का तुलनात्मक अध्ययन, 39. दशवौकलिकसूत्र, 4/9 40. सूत्रकृतांगसूत्र, 2/2/4 41. उत्तराध्ययनसूत्र, 28/14 42. तत्त्वार्थसूत्र, 1/4 43. इसिभासियाइं (ऋषिभाषित), 9/2 44. समयसार (कुन्दकुन्द), 145-146 45. प्रवचनसार टीका (अमृतचन्द्र), 1/72 की टीका 46. समयसार वचनिका, जयचन्द छाबड़ा, गाथा 145-146 की वचनिका पृ. 207 47. भगवद्गीता, 4/16 48. सूत्रकृतांग, 1/8/22-24 49. भगवद्गीता 4/16 50. सूत्रकृतांगसूत्र, 1/8/1-2 51. वही, 1/8/3 52. आचारांगसूत्र, 1/4/2/1 53. सागरमल जैन - जैन कर्मसिद्धान्त का तुलनात्मक अध्ययन, पृ. 52-55 54. वही, पृ. 61-67 55. वही, पृ. 57 56. (अ) वही, पृ. 67-79 (ब) प्रस्तुत विवरण तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 6 एवं 8, कर्मग्रन्थ प्रथम, (कर्मविपाक) पृ.
54-62, समवायांग 30/1 तथा स्थानांग 1/4/4/373 पर आधारित है।
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जैन धर्मदर्शन
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