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मण्डली तप विधि की तात्त्विक विमर्शना... 133
शिष्य – खमा. इच्छा. संदि भगवन् वसति पवेवा मुहपत्ति पडिलेहुं? गुरु - पडिलेहेह । शिष्य - इच्छं, शिष्य - मुखवस्त्रिका का प्रतिलेखन करें। शिष्य - खमा.इच्छा.संदिसह भगवन्! वसति संदिसाहुं ? गुरु - संदिसावेह | शिष्य - इच्छं। शिष्य – खमा. भगवन् सुद्धावसहि । गुरु - तहत्ति । शिष्य - इच्छं ।
2. प्रतिलेखन विधि - इस विधि के द्वारा रजोहरण- आसन आदि का प्रतिलेखन, शरीरस्थ वस्त्रों का प्रतिलेखन एवं कम्बली - संस्तारक आदि अतिरिक्त वस्त्रों का प्रतिलेखन करने की अनुमति प्राप्त की जाती है।
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शिष्य – खमा इच्छा. संदि. भगवन् इरियावहियं पडिक्कमामि ? गुरुपडिक्कमेह । शिष्य - इच्छं । पूर्ववत इरियावहि तस्स. अन्नत्थ. कहकर ‘सागरवरगंभीरा’ तक लोगस्स का कायोत्सर्ग करें, फिर प्रकट में लोगस्स कहें। शिष्य – खमा. इच्छा. संदि. भगवन् ! पडिलेहण संदिसाहुं ? गुरु - संदिसावेह । शिष्य - इच्छं। शिष्य - खमा इच्छा. संदिसह भगवन् ! पडिलेहण करूँ ? गुरु - करेह । शिष्य - इच्छं । शिष्य – मुखवस्त्रिका प्रतिलेखन करें। शिष्य - खमा. इच्छा. संदिसह भगवन्! अंगपडिलेहण संदिसाहुं ? गुरु - संदिसावेह । शिष्य - इच्छं। शिष्य - खमा इच्छा. संदिसह भगवन्! अंग पडिलेहण करूं? गुरु - करेह । शिष्य - इच्छं। मुखवस्त्रिका सहित अंगस्थ वस्त्रों की प्रतिलेखना करें। यदि अनुकूलता न हो तो केवल मुखवस्त्रिका ही प्रतिलेखित करें। शिष्य - खमा. इच्छाकारेण संदिसह भगवन् पसायकरी पडिलेहण पडिलावोजी । गुरु - पडिलेहेह। शिष्य - इच्छं। मुखवस्त्रिका का प्रतिलेखन करें। शिष्य – खमा. इच्छा. संदिसह भगवन्! उपधि पडिलेहण संदिसाहुं ? गुरु - संदिसादेह । शिष्य - इच्छं । शिष्य - खमा इच्छा. संदिसह भगवन् ! उपधि पडिलेहण करूँ ? गुरु - करेह । शिष्य - इच्छं । शिष्य - अणुजाणह जस्सुग्गहो वोसिरामि वोसिरामि वोसिरामि। शिष्य – खमा. ईर्यापथिक प्रतिक्रमण का आदेश लें।
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सूत्र मण्डली उत्क्षेप ( प्रवेश) विधि - यह विधि सूत्र मण्डली में प्रवेश करने से सम्बन्धित है। इस विधि के द्वारा मुनि मण्डल के साथ बैठकर सूत्राभ्यास करने की अनुमति प्राप्त की जाती है ।
सर्वप्रथम शिष्य खमा इच्छा. संदि. भगवन्! सुत्त मण्डली तवं उक्खिवह? गुरु - उक्खिवामो । शिष्य - इच्छं । शिष्य - खमा इच्छा. संदि. भगवन्! सुत्त मंडली तवं उक्खिवणत्थं काउसग्गं करूँ ? गुरु - करेह । शिष्य -