SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 2
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्रीयशोविजय जैनग्रन्थमाला ( १०० पानानुं मासिक ) आ मासिक अमारी तरफथी कोई प्रकारनो स्वार्थ राख्या विना सं० १९६६ कार्त्तिक सुदी १ थी बहार पाडवामां आवे - छे. जेनी अंदर, न्याय, व्याकरण, काव्य, कोश, नाटक चम्पू, इत्यादि पूर्वाचार्यों कृत लुप्तप्रायः ग्रन्थो प्रसिद्ध करवामां आवेछे. आ मासिक संबंधी एतद्देशीय तेमज पाश्चात्य विद्वानोनी अनेक सहानुभूति आवेली छे. नमूना दाखल कोइने अंक मोकलवामां आवतो नथी. तेमज वार्षिक लवाजम रु-८-०-० प्रथमथीज लेवामां आवे छे. संस्कृत साहित्यना शोखीनोने बुद्धिचक्षु वधारवानो आ अपूर्व रस्तो छे. जैनतत्त्वदिग्दर्शन- व्याख्यानना रूपमां आ हिन्दीभाषांनो ग्रन्थ शास्त्रविशारदजैनाचार्य श्रीविजयधर्मसूरिमहाराजे लखेल छे. जैनधर्मनुं संक्षेपमां स्वरूप जाणवाने अतीव उपयोगी छे. किं. ०-४-० लखो शाह. हर्षचन्द्र भूराभाई धर्माभ्युदय प्रेस, अंग्रेजी कोठी बनारस सिटी ।
SR No.006110
Book TitleAtmonnati Digdarshan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaydharmsuri
PublisherShah Harakchand Bhurabhai
Publication Year
Total Pages36
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy