SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 177
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ १६८ (१) मागधी भाषानो सरळ अभ्यास. थई शके तेने माटे मागधी (प्राकृत) भाषानो कोश तैयार कराववा तमाम जैनोर्नु लक्ष आ कॉन्फरन्स खेंचे छे, तथा . (२) मागधी भाषानुं संपूर्ण व्याकरण सरळ पद्धतिए तैयार करवानी अतिजरुर आ कॉन्फरन्स स्वीकारे छे अने आ बाबतमा जे प्रयास अत्यार सुधीमां थयो छे तेने माटे धन्यवाद आपी ते दिशामां वधारे प्रयास करवा खास भलामण करे छे. (३) जैनो हस्तक चालती संस्कृत पाठशाळाओमां तेम ज ऊंची जैन धार्मिक शाळाओमां मागधी भाषानुं खास शिक्षण आपg जोईए एवो आ कॉन्फरन्स आग्रह करे छे. (४) हिन्दुस्ताननी जुदी जुदी युनिवर्सिटीओमां मागधी भाषा बीजी भाषा तरीके जैन विद्यार्थीओ लई शके तेने माटे प्रयास करवा जैन साक्षरो तथा संस्थाओने आ कॉन्फरन्स आग्रहपूर्वक भलामण करे छे." _ (दसमुं मुंबई अधिवेशन ठराव ५मो). तेवो ज बीजो ठराव आ रह्यो. (१) आर्यभाषाना विकासनो इतिहास जाणवा जाटे अर्धमागधी अगत्यनी भाषा छे तेम ज भारतवर्षना आर्य दर्शनोमां गहत्त्वना गणाता जैन दर्शनने समजवा माटे पण अर्धमागधी एक आवश्यक भाषा छे. तेथी ज मुंबई युनिवर्सिटीए पोताना अभ्यासक्रममा उच्चमां उच्च वर्गो सुधी अर्धमागधीने दाखल करी के. ए माटे तेम ज जे जैन के अजैन संस्थाओए पोताना अभ्यासक्रममा अर्धमागधी भाषाने अपनावी छे ते माटे ते सर्व प्रत्ये आ कॉन्फरन्स आभारनी लागणी प्रदर्शित करे छे तेम ज Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005582
Book TitleJain Shwetambar Conferenceno Itihas
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagkumar Makatai
PublisherSohanlal Madansinh Kothari
Publication Year1960
Total Pages216
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size14 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy