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________________ सारी वस्तुएं उसीके द्वारा और उसीके "फिर परमेश्वरने कहा-हम मनुष्यको लिए सृजी गई ।३ अपने स्वरुपके अनुसार अपनी समानता में एक अन्य स्थान पर प्रभु यीशु मसीहका बनाएँ, और वे समुद्रकी मछलीयों और पीछे शिष्य यूहन्ना लिखता है कि आकाशके पक्षीओं पर और सब रेंगने वाले "सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते है। और जो कुछ उत्पन्न हुआ है. उसमें से अधिकार रखें कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न नहीं तब परमेश्वरने मनुष्यको अपने स्वरुपके हुई ।४ अनुसार उत्पन्न किया अपने ही स्वरुपके परमेश्वरने सृष्टिकी उत्पत्ति चार चारण अनुसार परमेश्वरने उसको उत्पन्न किया. नर में की । सृष्टि एक ही बारमें अस्तित्व में और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि नहीं आई। की.७ प्रथम चरणमें उसने आकाश और पृथ्वीको इस प्रकार छ दिनमें परमेश्वर द्वारा बनाया जैसा कि हमने ऊपर देखा। सृष्टिकी रचना की गई. और कालका आरंभ दूसरे चरणमें अपने पृथ्वी पर हरी घास भी प्रथम सृष्टिके साथ हुआ. बीज वाले छोटे छोटे पेड़ और फलदायी यहां एक विशेष तथ्य ध्यानमें रखना वृक्ष भी जिनके बीज उन्हीं में से एक एक की है किजातिके अनुसार होते है पृथ्वी पर उगने के परमेश्वरकी दृष्टि में छ दिनका अर्थ हमारे लिए कहे.५ .. दिन रातके समयसें नहीं है. तीसरे चरणमें परमेश्वरने प्राणियोंकी . बाइबलका इस विषयमें विशेष दृष्टिकोण रचनाकी बाइबल में लिखा है कि- है । इस विषय पर कहा गया है कि .. " परमेश्वरने जाति जातिके बड़े बड़े “हे प्रियो ! यह एकबात तुमसे छीपी जलजन्तुओं की और सब जीवितप्राणीओं की न रहे कि प्रभु के यहां एकदिन हजार वर्ष भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं, और एक-एक के बराबर है और हजार वर्ष एकदिन के . जातिके उडनेवाले पक्षिओं की भी सृष्टि की.” बराबर है८” चोथे६ चरणमें परमेश्वरने मनुष्यकी इस तथ्यसे यह निष्कर्ष निकाला जा रचनाकी जिसका वर्णन निम्नलिखित शब्दों में सकता है कि संसार के सृष्टि छ हजार वर्षों किया है, में हुइ है। ३. कुलुस्सियो १: १५-१६ ____ उपरोक्त तथ्यों के आधार पर मसीही ४. यूहन्ना १: ३ धर्म पृथ्वीकी सृष्टि शून्यसे मानता है। ५ उत्पत्ति- १:११ ७ उत्पत्ति- २६-२७ ६ उत्पत्ति- १-२१ ८ २. पतरस - ३-८ Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005569
Book TitleJambudwip Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhaman Jain Pedhi
PublisherVardhaman Jain Pedhi
Publication Year
Total Pages250
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size6 MB
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