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________________ चंदराजानो रास. १२१ ॥ चंद राजा कहुं, हे चतुरा, तमे जे साचो वृत्तांत कह्यो, ते सांजस्यो, जे स्त्री पतिव्रता होय तेनो एवोज धर्म बे ॥ १ ॥ पतिने माटे न करवानुं करे ने विशेषथी सुकृत करे, ए सतीउनी संस्कार पामेली प्रकृति होय . ॥ २ ॥ सुती माता हित करे, पतिभक्ति होय नार ॥ शी अधिकार ते हमें, वे जग स्थिति व्यवहार ॥ ३ ॥ मुज कारण उजागरो, कर्यो तमे बहुरीत ॥ जली थs करुणा करी, म तुम साची प्रीत ॥ ४ ॥ ॥ माता पुत्र उपर हेत करे ने स्त्री पति जक्ति करे, तेमां शुं अधिक बे ? ए तो जगत् स्थितिनो व्यवहार बे. ॥ ३ ॥ तमे मारे माटे बहु प्रकारे उजागरो कर्यो, ए मोटी दया करी. तमारीमारा उपर साची प्रीति बे. ॥ ४ ॥ जुम कहो तमे, मान्यां वचन विराम ॥ जो जुलुं जाषो तमे, तो वायस होय श्याम ॥ ५ ॥ जो प्रभु रास रम्यो नही, मुज माटे तमेनार ॥ तो सायर खारो हुवे, दिनकर वमे तुखार ॥ ६ ॥ ॥ तमे जुबुं शामाटे बोलो! तमारां वचन में शांतिथी मान्यां बे. जो तमे जुतुं वोलो तो कागमो श्याम थर जाय ॥ ५ ॥ हे स्त्री ! जो तमे मारे माटे जिन प्रजुनो रास न रम्यां हो तो सागर खारो थाय सूर्यमाथी जानुं वमन थाय. ॥ ६ ॥ तुम वि कुप पतिना जतन, करे अवर संसार ॥ श्राव्यो मालव देशनो, चांपल देनें जार ॥ ७ ॥ ॥ संसारमा तमारा शिवाय बीजी कोण स्त्री पतिनी जतना करे. मारे घेर तो मालवदेशनुं रन व् बे ॥ ७ ॥ ॥ ढाल वीशमी ॥ ॥ सखीरी खायो वसंत घटारको, सुरिजन खेले फाग चतुरजन सोहना ॥ ए देशी ॥ सखीरी चंद कहे चंद्रानने ॥ चंद्रा० ॥ तुम वचने बे प्रतीत | सुगुण जन सांजलो ॥०॥ पण मुज विनति चित्त धरो ॥ चि० ॥ कहे कहेवाये ए रीत ॥ सु० ॥ १ ॥ स० ॥ रास मंगल जिनराजनो ॥ जि० ॥ उदय किहांथी थाय ॥ सु० ॥ स० ॥ एवं जाग्य कहां थकी ॥ कि० ॥ जे जिनगुण गवराय ॥ सु० ॥ २ ॥ || चंद्र कहे - हे चंद्र मुखी, मारे तमारां वचन उपर प्रतीति बे. पण सद्गुणीजन, सांजलो विनंति मनमां धरो. ए कहेबानी रीत बे. ॥ १ ॥ श्रीजिन प्रजुनो रास क्यांथी उदय थाय. अने श्री जिनराजन गुण गवाय एहवं जाग्य क्यांथी होय ? ॥ २ ॥ ०॥ जिननी नक्ति जो कीजीये ॥ जो० ॥ तो लहीये जवपार ॥ सु०॥ स०॥ केवल ल दीने ते होवे ||(पाठांतरे ) || जिन गुण गातां बहु थया ॥ ० ॥ ज्योति वधु जरतार 00 Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005375
Book TitleChand Rajano Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1905
Total Pages396
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size17 MB
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