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________________ ( ए) क अनलगिरि नाम,अमिनीरु रथ अनिराम ॥ शिवा नामें राणी बदजुत,लोह जंगो राजानो दूत ॥ ७ ॥ ए चारे द्यो मुज एक वार, पडे करगुं ते मुकुट विचा र॥ दूत जइ कहे सघला बोल, चंप्रद्योतन कोप्यो निटोल ॥ ७ ॥ राग एह नस्यो नपाल, चडनडतानी चोथी ढाल ॥ समयसुंदर कहे हवे संग्राम, करशे पण रेहेशे नहीं माम ॥ ए॥ ॥ ढाल पांचमी ॥ राग रामग्री ॥ नणे मंदोदरी दैत्य दशकंधरा॥ ए देशी॥ अथवा कडखानी देशी ॥ ॥चडयो रण फूजवा चंम्प्रद्योत नृप, चडतनां तुरत वाजा वजायां ॥सुनट नट कटक चड, मटकि नेता थयां, वडवडा वागीया वेगें धाया ॥१॥ च ड्योाथ गजवर्णनं ॥ शीश सिंदूरीया प्रबल मद पूरीया,नमर गुंजार नीषण कपोला ॥ शूढ उत्साल ता, शत्रु दल पाडता,हाथीया करत हालाकलोला। ॥॥ च०॥ घंट वाजी गले रहे एका मले, मेह काली घटा जाणे दीसे ॥ ढलकती ढाल ने शीश चा मर ढले, मत्त मातंग रहे नया रीसें ॥३॥ च०॥ हा लता चालता जाणे करी पर्वता, गुहर गुंजार गंनीर करता ॥ चंप्रद्योत राजा तणा कटक, हस्ती लाख Jain Educationa Interational For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005374
Book TitleKarkanduadik Char Pratyek Buddhno Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages104
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size7 MB
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