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________________ कोक्कास ] [ ५१ साथै आकाशमां फरतो. पछी बधा राजाओने पण तेणे आ रीते पोतानो प्रभाव बतावीने वश करी लोधा. हवे, एक बार राजानी बीजी एक इर्ष्यालु राणीए यंत्रने पा लावा माटेनी खीली काढी नाखी. गरुड आकाशमां ऊड्या पछी आ वातनी राजाने खबर पडी. कलिंगदेशमां ऋषिप्राणित तळाव आगळ जोरथी ऊडतां गरुडनी पांख भांगी गई, अने सौ नीचे पडयां. गरुडनी पांख सांधवा माटे सामग्री मेळवावा माटे कोक्कास नीकळ्यो अने एक रथका पाईने तेणे एनां उपकरणो माग्यां रथकार उपकरण लेवा गयो, एटलामां तो कोक्का से तेना रथनुं चक्र तैयार करी आयु. आ निपुणता उपरथी रथकारे अनुमान कर्यु के आज कोकास होवो जोईए. तेणे जईने पोताना राजाने खबर आपी. राजाए कोक्कासने तथा काकवर्ण राजा अने तेनी देवीने पकड्यां. पछी कलिंगना राजाए कोक्कास पासे पोताने माटे अने पोताना पुत्र माटे प्रासाद तैयार कराव्यो. आ पछो कोकासे काकवर्णना पुत्रने पत्र लख्यो के 'हुं कलिंगना राजाने मारुं एटले तुं मने अने तारां मातापिताने छोडाव. ' आ माटेनो नियत दिवस पण तेणे पत्रभां लख्यो. ए दिवसे कलिंगनो राजा पुत्र सहित प्रासादमा प्रवेश्यो, एटले कोकासे यंत्रनी खोली दबावतां पुत्रसहित राजा मरण पाम्यो. काकवर्णना पुत्रे नगर कबजे कर्यु तथा मातापिताने अने कोक्कासने छोडाव्यां.' कोक्कासनुं कथानक आगमेतर साहित्यमां सौथी प्राचीन स्वरूपे वसुदेव- हिंडी 'मां छे. बाल्यावस्थामां ते खांडणिया पासे बेसतो अने डांगरनी कुसकी ('कुक्कुसे' ) खातो, तेथी एनुं नाम कोक्कास पड्यु, 6 एम वसुदेव - हिंडी" नोधे छे. जो के उपर्युक्त कथानक साथे तुलना करतां एना प्रसंगौमां कंईक फेर मालूम पडे छे. 'आवश्यक चूर्णि 'वाळा कथानकमां यांत्रिक गरुड कलिंग देशमां ऋषिप्राणित तळाब आगळ ऊतरे छे, ज्यारे 'वसुदेव - हिंडी' मां कोक्का से बनावेला वायुयानने " Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.005124
Book TitleJain Sahitya ma Gujarat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBhogilal J Sandesara
PublisherGujarat Vidyasabha
Publication Year1952
Total Pages316
LanguageGujarati, Sanskrit
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
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