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________________ बोच्या-कुमार ! शुं मने जीवन देवा माटेज तुं अहीं आवेल छे ? अथवा बीजुं कई अहीं आवबाचं कारण छे ? कुमार बोल्यो-मात्र कुतू. हळने लोधे ज हुं तो नीफळी पडयो, बीजें कई कारण नथी. विद्याधर बोल्यो-जो एम छे तो मारा उपर कृपा करो अने मारी साथे वैताढय पर्वत ऊपर चालो, त्यांना अनेक आश्चर्यकारक बनावो जुओ अने तमारा दर्शन आपोने मारा आखा कुटुम्ब उपर उपकार करो. कुतूहळोने जोवानी तीव्र इच्छा होवाथी कुमारे तेनु- विद्याधरर्नु वचन मान्यु. पछी ते विद्याधर कुमारने साथे लईने अन्धाराना समूह जेवा श्याम आकाशमा उड्यो, आंखनुं मटकुं मारतां ज एटले एटला वखतमां ते वैताढ्य पर्वत ऊपर पहोंची गयो. पोताना घरमा प्रवेश कर्यो अने भोजन वगेर वडे कुमारनो सारो सत्कार कर्यो. हवे आ तरफ पेलो भील ज्यां हतो त्यां कुमारनी एक पहोर सुधी राह जोई छतां कुमार पाछो न फर्यो त्यारे आसपासनी वनकुंजोमां लांबो वखत तपास करीने दुःखी थईने पोतानी गुफामां गयो. कुमार पण कनकचूड विद्याधर साये सुगंधी पारिजात वृक्षनी मंजरीओनी गंधथी महेक महेक थता, पर्वतना वांकाचूंका ढोळाव अमें अने चडाववाळा प्रदेशमाथी पडता झरणाना अवाजोने लीधे मनोहर देखाता, हावभाव साथे किन्नर किन्नरीना जोडाना संयोगना शब्दोने लीधे सुन्दर लागता, पोतानी कुंजोने लीधे सुशोभित बनेला एवा वताढ्य पर्वतना आसपासना प्रदेशोमां फरवा लाग्यो. हवे भमतांभमतां [पृ०५६] कुतूहळोने जोवा फाटी आंखवाळा कुमारेत्यां एक ठेकाणे Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004873
Book TitleMahavira Charit
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBechardas Doshi
PublisherPrakrit Vidya Mandal Ahmedabad
Publication Year1966
Total Pages154
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati, History, & Story
File Size6 MB
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