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चित्र ९
चाऊण देवलोगाओ उववन्नो माणुसंमि लोगंमि । उवसंतमोहणिज्जो सरती पोराणियं जाई ॥ अ०९ गा०१॥
उत्तराध्ययन अ०९
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एवं करिति संबुद्धा, पंडिया पवियक्खणा । विणियटृति भोगेसु, जहा से णमिरायरिसि ॥ अ०९ गा०६२ ॥
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