________________ कित्तिय वंदिय महिया, कि० वाणी द्वारा कीर्ति ( स्तुति ) करना वं० शरीर द्वारा वन्दन करना, म० मन द्वारा पूजा करना' इस प्रकार तीनों शब्दों का मन, वचन, और शरीर द्वाग भक्ति करने का अर्थ होता है, यदि महिया शब्द से फूलों से पूजा करने का कहोगे तो मन द्वारा भाव पूजा करने का दूसरा कौनसा शब्द है ? और जब सारा लोगस्स का पाठ ही अन्य द्रव्यों से प्रभु भक्ति करने की अपेक्षा नहीं रखता तब अकेला महिया शब्द किस प्रकार अन्य द्रव्यों को स्थान दे सकता है ? वैसे तो आप पुष्पादिभिः के साथ 'जना. दिभिः' 'चन्दनादिभिः' 'श्राभूपणादिभिः धुपादिभिः मनमाना अर्थ लगा सकते हो इसमें आपको रोक ही कौन सक ता है ? किन्तु इस प्रकार मनमानी धकाने में कुछ भी लाभ नहीं है, उल्टा व्यर्थ में हिंसा को प्रोत्साहन मिलता है, जिस से हानि अवश्य है / सरल भाव से सोचने पर ज्ञात होगा कि मूल में तो मात्र 'महिया' शब्द ही है, जिसका अर्थ पूजा