________________ 21 --नोट मूर्ति नहीं है। प्रश्न-नोट तो रुपयों की स्थापना ही है, उनसे जहां चाहे रुपये मिल सकते हैं, इसमें आपका क्या समाधान है ? उत्तर-जिस प्रकार हुण्डी भाव निक्षेप है वैसे ही नोट भी भाव निक्षेप में है, स्थापना में नहीं। प्रथम आपको यह याद रखना चाहिये कि सिक्के एक प्रकार के ही नहीं होते, सोने, चांदी, तांश, कागज़ आदि कई प्रकार के होते हैं। जैसे रुपया, अठन्नी, चौअन्नी, दुअन्नी, इकन्नी यह चांदी या मिश्रित धातु के सिक्के हैं, वैसे ही तांबे के पैसे, सोने की गिन्नी, मोहर आदि कागज़ के नोट ये सब सिक्के हैं। प्रत्येक सिक्का अपने भाव निक्षेप में है, किसी की स्थापना नहीं। इनमें से किसी एक को भाव और दूसरे को उसके स्थापना कहना अक्षता है। नोट की स्थापना निक्षेप नोट की प्रतिलिपि है वैसे है रुपये का चित्र रुपये की स्थापना है। रुपये स्वर्ण मुद्रिक या नोट के अनेकों चित्र रखने वाला कोई दरिद्र, निर्धन धन