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________________ तृतीयो मर्त्य विभागः * संशयालुनामानि * संशयालुः' सांसयिकः२, संशायिता जनो भवेत् / / 675 / / * गृहयालुनाम * पतयालुनाम के गृहीता' गृहयालुः२ स्यात्, पतयालु' स्तु पातक:२ / के रोचिष्णुनाम के रोचिष्णुः' कान्तिमान् लोको, रोचनः 2 पुनरुच्यते / / 676 // __* दक्षिणाहनामानि * दक्षिण्यो' दक्षिणाई श्च, दक्षिणीयो ऽपि कथ्यते / * दण्डितनामानि * दण्डं प्राप्तो दण्डितः' स्याद्, दापितः साधित स्तथा / / 677 // * पूज्यनाम * अर्य' स्तथा प्रतीक्ष्यो ऽपि, द्वयं स्याद् पूज्यवाचकः / * पूजितनामानि * प्रचितो' ऽपचितोचित, स्तथाऽपचायितो ऽहितः / / 678 / / नमसितो नमस्यितः, पूजित श्चेति पूजितः / * पूजानामानि * अर्चा' ऽहणा' सपर्या स्यात्, पूजा' चाऽपचिति' स्तथा // 66 //
SR No.004481
Book TitleSushil Nammala
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaysushilsuri
PublisherSushilsuri Jain Gyanmandiram
Publication Year1988
Total Pages878
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size36 MB
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