________________ // अहम् // भीयशोविजयजी जैनग्रन्थमालासे उपलब्ध संस्कृत-प्राकृत ग्रन्थोंकी सूची -**- 'भारते भातु भारती न्याय 1 रत्नाकरावतारिका-( दुष्प्राप्य )बारहवीं शताब्दी के तार्किक पूज्य श्रीवादिदेवसूरि के प्रमाणनयतत्वालोकालकार के ऊपर यह, उन्ही के विद्वान् शिष्य श्रीरत्नप्रभसूरि की बनाई हुई; स्याद्वादरत्नाकर के सारांश रूप सुन्दर और प्रौढ टीका है / इसकी भाषा बहुत छटादार और आलङ्कारिक है, इसीलिये यह न्याय की कादम्बरी या तिलकमलरी कही जाती है / भट्टचट्टघट्टना” जैसे इसके अनेक वाक्य कई विद्वानों के जिहान हैं / कलकत्ता युनिवर्सिटीने इसे जैनन्यायतीर्थ में दाखिल किया है। डेमी अष्ट पेनी साइज़ के 273 पृष्ट और सुन्दर प्रस्तावना सहित मूल्य रु. 6-0-0.