SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 242
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ अब धीरे-धीरे पुनः सीधी अवस्था में आ जाइये / कुछ विश्राम के पश्चात् पुनः उपरोक्त क्रिया कीजिये / प्रकारान्तर भुजाओं को नीचे 45 अंश पर सीधा रखकर इसका अभ्यास कीजिये। श्वास एक पैर पर खड़े रहने पर पूरक कीजिये / शरीर को नीचे करते समय एवं उठते समय श्वास रोकिये। वापस सीधी अवस्था में आकर रेचक कीजिये / अंतिम अवस्था में सामान्य श्वास-प्रश्वास कीजिये / आवृत्ति प्रत्येक पैर से अधिकाधिक 10 बार अभ्यास कीजिये / एकाग्रता . स्थिर बिन्दु पर दृष्टि केन्द्रित करते हुये शारीरिक संतुलन पर / लाम पैरों के स्नायुओं को शक्ति प्रदान करता है। घुटनों की संधियों को लचीला बनाता है / इससे वात रोग में बहुत लाभ पहुँचता है। अतिरिक्त मांसपेशियों को कम करता है। वृक्क की असामान्य क्रिया में सामान्यता लाते हुए बहुमूत्र-दोष का निवारण करता है। प्रजनन - संस्थान के स्नायुओं एवं नाड़ियों को शक्ति प्रदान करता है, फलतः वीर्य की रक्षा होती है। 225
SR No.004406
Book TitleAasan Pranayam Mudra Bandh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSatyanand Sarasvati
PublisherBihar Yog Vidyalay
Publication Year2004
Total Pages440
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy