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________________ भगवई स. 5 उ. 7 531 वगो तहा णेयव्वो जाव दुरहियासे // 208 // आहाकम्मं अणवज्जेत्ति मणं पहारेत्ता भवइ, से गं तस्स ठाणस्स अणालोइयपडिक्कते कालं करेइ पत्थि तस्स आराहणा, से णं तस्स ठाणस्स आलोइयपडिक्कते कालं करेइ-अस्थि तस्स आराहणा / एएणं गमेणं णेयवं-कीयगडं ठवियं रइयं कतारभत्तं दुभिक्खभत्तं वद्दलियाभत्तं गिलाणभत्तं सेज्जायरपिंडं रायपिडं / आहाकम्मं अणवजेत्ति बहुजणस्स मज्झे भासित्ता सयमेव परि जित्ता भवइ से गं तस्स ठाणस्स जाव अत्थि तस्स आराहणा। एयपि तह चेव जाव रायर्यापडं / आहाकम्म अणवज्जेत्ति अण्णमण्णस्स अणुप्पदावइत्ता भवइ, से णं तस्स एवं तह चेव जाव रायपिंडं / आहाकम्म णं अणवज्जेत्ति बहजणमज्झे पण्णवइत्ता भवइ से णं तस्स जावअत्थि आराहणा जाव रायपिडं // 206 // आयरियउवज्झाए णं भंते ! सवि. सयंसि गणं अगिलाए संगिण्हमाणे अगिलाए उवगिण्हमाणे कहिं भवग्गहणेहि सिज्मइ जाव अंतं करेइ ? गोयमा ! अत्थेगइए तेणेव भवग्गहणेणं सिज्झइ अत्थेगइए दोच्चेणं भवग्गहणेणं सिज्झइ तच्चं पुण भवग्गहणं गाइक्कमइ // 210 // जेणं भंते ! परं अलिएणं असन्भएणं अभक्खाणेणं अब्भक्खाइ तस्स णं कहप्प. गारा कम्मा कज्जंति ? गोयमा ! जेणं परं अलिएणं असंतवयणेणं अब्भक्खाजेणं अब्भक्खाइ तस्स णं तहप्पगारा चेव कम्मा कज्जति, जत्थेव गं अभिसमा. गच्छइ तत्थेव णं पडिसंवेदेइ तओ से पच्छा वेदेइ / सेवं भंते ! 2 त्ति // 211 // पंचमं सयं सत्तमो उद्देसो परमाणुपोग्गले गं भंते ! एयइ वेयइ जाव तं तं भावं परिणमइ ? गोयमा ! सिय एयइ वेयइ जाव परिणमइ सिय णो एयइ जाव णो परिणमइ / दुप्पएसिए णं भंते ! खंधे एयइ जाव परिणमइ ? गोयमा ! सिय एयइ जाव परिणमइ सिय णो एयइ जाव णो परिणमइ, सिय देसे एयइ देसे णो एयइ / तिप्पएसिए णं भंते ! खंधे एयइ. ? गोयमा ! सिय एयइ सिय णो एयइ, सिय देसे एयइ णो देसे एयइ सिय देसे एयइ णो देसा एयंति सिय देसा एयंति णो देसे एयइ / चउप्पएसिए णं भंते ! खंधे एयइ० ? गोयमा ! सिय एयइ सिय णो एयइ सिय देसे एयइ णो देसे एयइ सिय देसे एयइ णो देसा एयंति सिय देसा एयंति णो देसे एयइ सिय देसा एयंति णो देसा एयंति जहा चउप्पएसिओ तहा पंचपएसिओ तहा जाव अणंतपएसिओ // 212 // परमाणुपोग्गले णं भंते ! असिधारं वा खुरधारं वा ओगाहेज्जा ? हंता! ओगा.
SR No.004390
Book TitleAngpavittha Suttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1982
Total Pages1476
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size23 MB
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