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________________ ठाणं ठा. 10 णितले देसूणाई दस जोयणसहस्साई विक्खंभेणं उवरि दस जोयणसयाई विक्खंभेणं प० // 33 // पुक्खरवरदीवद्धगा णं मंदरा दस जोयण एवं चेव // 34 // सव्वेवि णं वट्टवेयड्पव्वया दसजोयणसयाइं उर्दू उच्चत्तेणं दस गाउयसयाई उव्वे हेणं सन्नत्थसमा पल्लगसंठाणसंठिया दसजोयणसयाई विक्खंभेणं प० // 35 // जंबुद्दीवे दीवे दस खेत्ता प० तं० भरहे एरवए हेमवए हेरण्णवए हरिवस्से रम्मगवस्से पुवविदेहे अवरविदेहे देवकुरा उत्तरकुरा // 36 // माणुसुत्तरे णं पव्वए मूले दस बावीसे जोयणसए विक्खंभेणं प० // 37 // सव्वेवि णं अंजणगपव्वया दस जोयण. सयाइं उबेहेणं मूले दस जोयणसहस्साई विक्खंभेणं उवरिं दस जोयणसयाई विक्खं. भेणं प० // 38 // सव्वेवि णं दहिमुहपव्वया दस जोयणसयाइं उव्वे हेणं सव्वत्थसमा पल्लगसंठाणसंठिया दस जोयणसहस्साई विक्खंभेणं प० // 39 // सव्वेवि णं रइकरय. पव्वया दस जोयणसयाई उर्दू उच्चत्तेणं दस गाउयसयाइं उव्वेहेणं सव्वत्थसमा झल्लरिसंठाणसंठिया दस जोयणसहस्साई विक्खंभेणं प० // 40 // रुयगवरे णं पव्वए दस जोयणसयाइं उव्वेहेणं, मूले दस जोयणसहस्साई विक्खंभेणं उवरि दस जोयण. सयाई विक्खंभेणं प०, एवं कुंडलवरेवि // 41 // दसविहे दवियाणुओगे प० तं० दवियाणुओगे माउयाणुओगे एगट्ठियाणुओगे करणाणुओगे अप्पियणप्पिए भावियाभाविए बाहिराबाहिरे सासयासासए तहणाणे अतहणाणे // 42 // चमरस्स णं असुरिंदस्स असुरकुमाररण्णो तिगिच्छिकूडे उप्पायपव्वए मूले दसबावीसे जोयणसए विक्खंभेणं प० // 43 / / चमरस्स णं असुरिंदस्स असुरकुमाररण्णो सोमस्स महारणो सोमप्पभे उप्पान्यपव्वए दस जोयणसयाई उर्दू उच्चत्तेणं दस गाउयसयाई उब्वेहेणं मूले दस जोयणसयाई विक्खंभेणं प०॥४४॥ चमरस्स णं असुरिंदस्स असुरकुमाररण्णो जमस्स महारण्णो जमप्पभे उप्पायपव्वए एवं चेव, एवं वरुणस्सवि, एवं वेसमणस्स वि / / 45 // बलिस्स णं वइरोयणिंदस्स वइरोयणरण्णो रुयगिंदे उप्पायपत्रए मूले दसबावीसे जोयणसए विक्खंभेणं प० // 46 // बलिस्स णं वइरोयणिंदस्स सोमस्स एवं चेव / जहा चमरस्स लोगपालाणं तं चेव बलिस्स वि, // 47 // धरणस्स णं णागकुमारिंदस्स णागकुमाररण्णो धरणप्पभे उप्पायपव्वए दस जोयणसयाई उड्ढे उच्चत्तेणं दस गाउयसयाई उव्वेहेणं मूले दस जोयणसयाई विखंभेणं // 48 // धरणस्स णं णागकुमारिंदस्स णागकुमाररणो कालवालस्स महारणो महाकालप्पभे उप्पायपव्वए दस जोयणसयाई उर्दू उच्चत्तेणं एवं चेव, एवं
SR No.004390
Book TitleAngpavittha Suttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1982
Total Pages1476
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size23 MB
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