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________________ भगवई स. 30 उ. 1 1025 उयं पकरेंति० पुच्छा, गोयमा ! णो गेरइयाउयं एवं जहेव जीवा तहेव सलेस्सावि चउहिवि समोसरणेहि भाणियव्वा / कण्हलेस्सा गं भंते ! जीवा किरियावाई कि रइयाउयं पकरेंति० पुच्छा, गोयमा ! णो णेरइयाउयं पक. रेति णो तिरिक्खजोणियाउयं पकरेंति मणुस्साउयं पकरेंति णो देवाउयं पक. रेंति, अकिरियावाई अण्णाणियवाई वेणइयवाई य चत्तारिवि आउयाई पकरेंति, एवं णीललेस्सावि काउलेस्सावि / तेउलेस्सा णं भंते ! जीवा किरियावाई कि गैरइयाउयं पकरेंति० पुच्छा, गोयमा ! णो णेरइयाउयं पकरेंति णो तिरिक्खजोणियाउयं पकरेंति मणस्साउयंपि पकरेंति देवाउयंपि पकरेंति, जइ देवाउयं पकरेंति तहेव / तेउलेस्सा गं भंते ! जीवा अकिरियावाई कि रइयाउयं० पुच्छा, गोयमा ! णो णेरइयाउयं पकरेंति तिरिक्खजोणियाउयंपि पकरेंति मणुस्साउयंपि पकरेंति देवाउयंपि पकरेंति, एवं अण्णाणियवाईवि वेणइयवाईवि, जहा तेउलेस्सा एवं पम्हलेस्सावि सुक्कलेस्सावि यव्वा / अलेस्सा गं भंते ! जीवा किरियावाई कि रइयाउयं पकरेंति० पुच्छा, गोयमा ! णो णेरइयाउयं पकरेंति णो तिरिक्ख० मणस्स. णो देवाउयं पकरेंति / कण्हपक्खिया गं भंते ! जीवा अकिरियावाई कि रइयाउयं० पुच्छा, गोयमा ! रइयाउयंपि पकरेंति एवं चउविहंपि, एवं अण्णाणियवाईवि वेणइयवाईवि, सुक्कपक्खिया जहा सलेस्सा। सम्मदिट्ठी गं भंते ! जीवा किरियावाईं कि गैरइयाउयं पुच्छा, गोयमा ! णो णेरइयाज्यं पकरेंति णो तिरिक्खजोणियाउयं पकरेंति मणुस्साउयंपि पकरेंति देवाउयंपि पकरेंति, मिच्छादिट्ठी जहा कण्हपक्खिया। सम्मामिच्छादिट्ठीणं भंते ! जीवा अण्णाणियवाई किणेरइयाउयं०जहा अलेस्सा, एवं वेणइयवा. ईवि, गाणी आभिणिबोहियणाणी य सुयणाणी य ओहिणाणी य जहा सम्मदिट्ठी। मणपज्जवणाणी णं भंते ! कि०पुच्छा, गोयमा! णो णेरइयाउयं पकरेंति णो तिरिक्ख० णो मणस्साउयं पकरेंति देवाउयं पकरेंति / जइ देवाउयं पकरेंति किं भवण. वासि० पुच्छा, गोयमा! णो भवणवासिदेवाउयं पकरेंति णो वाणमंतर० णो जोइसिय०वेमाणियदेवाउयं पकरेंति,केवलणाणी जहा अलेस्सा, अण्णाणी जाव विभंग. णाणी जहा कण्हपंक्खिया, सणासु चउसुवि जहा सलेस्सा, णोसण्णोवउत्ता जहा मणपज्जवणाणी, सवेयगा जाव णपुंसगवेयगा जहा सलेस्सा, अवेयगा जहा अलेस्सा, सकसाई जाव लोभकसाई जहा सलेस्सा, अकसाई जहा अलेस्सा,
SR No.004390
Book TitleAngpavittha Suttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year1982
Total Pages1476
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_acharang, agam_sutrakritang, agam_sthanang, agam_samvayang, agam_bhagwati, agam_gyatadharmkatha, agam_upasakdasha, agam_antkrutdasha, & agam_anutta
File Size23 MB
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