________________ भाषाटीकासमेत / (39) भाषाटीका // मिश्री और निम्यूको रस पीवे तथा आमरेके पत्ते के रसको शरीरपे भीडे तो भिलावेकी महा व्याधिको दूर करै // 13 // ___ अथ कृमिरोगोपचारः // महानिम्बस्य पत्राणां रसो हि पलमानतः // पानात्कृमिभवं दोषं सद्यो हन्तिच निश्चितम्॥१४॥ भाषाटीका॥महानीमके पत्तोंका रस एक पलभर लेकर पीवे सो कमिकीडोंसे भये दोषको निश्चय जल्दी दूर करै 14 // अथ भगंदरवाते लेपः॥ चूर्णं जम्ब्वाम्रपत्राणां खररक्तेन भावयेत् // तल्लेपे विहिते याति भगन्दरमरुद्व्यथा // 19 // भाषाटीका / जामुन आम इनके पत्तानके चूर्णको गधाके लोहूकी भावना दे वाको लेप करे वो यासो भगन्दर वावव्याधिको हरै // 15 // _अथैरंडपाकः॥ प्रस्थप्रमाणानिलशबीजं ... सदुग्धप्रस्थाष्टकमत्रपक्त्वा // .. .. . प्रस्थैकखण्डेन पलानि पंच घृतहि योज्यं तदनु प्रकल्कः // 16 // हरिद्रामृतशुल्बंच मरिचं त्रिफलाभया // वंशलोचनवंगंच चातुर्जातमृताभ्रकैः // 17 //