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________________ मुख्य राजधानी का शहर अवन्ती, और उसकी कूदरतो रचना व वहाँ का राजमहल का वर्णन आप इस प्रकरणमें पढ़ेंगे / बादमें राजसभामें राजा भर्तृहरि के पास द्वारपाल द्वारा किसी ब्राह्मण का आगमन पढेंगे। साथ साथ ही वह ब्राह्मण राजाको दिव्य फल भेट करता है उस फलका वर्णन व यह बात आपको कुतूहल बढाकर आगे कया हाल होगा इसी इन्तेजारीमें रखकर यह प्रकरण खतम होता है। प्रकरण चौथा . . . . पृष्ठ 21 से 29 तक .. भर्तृहरिका संन्यास ग्रहण . . ___ यह प्रकरण आपको आश्चर्य मुग्ध बनायगा क्योंकी अवन्ती जैसी नगरी के वैभवों को छोड़कर महाराजा भर्तृहरि सन्न्यस्त ग्रहण करने के लिये चले जानेमें मुख्य कारणभूत पट्टरानी अनङ्गसेना का स्त्रीचरित्र एवं रानीके यार मावतके पाससे वेश्या द्वारा वह दिव्य फल वापिस उस के सच्चे मालिक महाराजा भर्तृहरि के पास पहोंचने से वैराग्य निकट पहुंचना और सन्न्यस्त ग्रहण करना और प्रजाजनके साथ मंत्री वर्ग की हार्दिक आजीजी पढ़ते पढ़ते आप इस प्रकरण को समाप्त करेंगे। पकरण पाचवा . . . . पृष्ठ 30 से 35 तक ... अवधूतको राज्य देनेका निश्चय . .. .. शोक विह्वल अवन्ती के प्रजाजन और सरदार-सामन्तोने राज्य सिंहासन सुना देखकर 'श्रीपति' नामक कुलीन क्षत्रिय को गद्दीनशीन क्रिया / रात्रिमें अग्निवैतालने उनको यमधाम पहुँचाया / फिर.. दूसरे Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004265
Book TitleMaharaj Vikram
Original Sutra AuthorShubhshil Gani
AuthorNiranjanvijay
PublisherNemi Amrut Khanti Niranjan Granthmala
Publication Year
Total Pages516
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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