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________________ अष्टम अध्याय शरीर, बंधन, संघात में अन्तर दृष्टांत जैसे दीवार बनाने के लिए शरीर ईंट जमाना समचतुस्र न्यग्रोध परिमण्डल शरीर ऊपर वट वृक्षवत् नाभि के नीचे व मध्य में नीचे के अंग छोटे एवं ऊपर के बड़े हों सम भाग हो बंधन ईंको गारे से जोड़ना Jain Education International सर्प की बाँबीवत् ऊपर के अंग छोटे एवं नीचे के बड़े हों संस्थान स्वाति कुब्जक वामन हुण्डक वज्रवृषभ व्रजनाराच नाराच नाराच वज्र के हाड़ वज्र के हाड़ वज्र रहित बेठन व वकीली हो कीलित कीलियाँ हो संहनन संघात सीमेंट से मजबूत करना हड्डियों की सन्धि हो कुबड़ा शरीर हो शरीर अवक्तव्य आकार हों बौना अनेक विरूप हो the 169 अर्द्धनाराच कीलक असंप्राप्ता सूपाटिका जुदे - 2 हड्डियों की हड्डियाँ सन्धि अर्द्ध कीलित हो कीलित हो परस्पर हाड़ For Personal & Private Use Only नसों से बँधे ह www.jainelibrary.org
SR No.004253
Book TitleTattvartha Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPuja Prakash Chhabda
PublisherJain Sanskruti Samrakshak Sangh Solapur
Publication Year2010
Total Pages258
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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