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________________ प्र.32 पूर्व कितने है नाम बताइये ? उ. पूर्व चौदह है - 1. उत्पाद 2. अग्रायणीय 3. वीर्य 4. अस्ति - नास्ति प्रवाद 5. ज्ञान प्रवाद 6. सत्य प्रवाद 7. आत्म प्रवाद 8. कर्म प्रवाद 9. प्रत्याख्यान 10. विद्यानुप्रवाद 11. अवन्ध्य 12. प्राणायु 13. क्रिया विशाल 14. लोक बिन्दुसार । (नंदी सूत्र) प्र.33 किस आगम में चौदह पूर्व समाविष्ट है ? उ. दृष्टिवाद नामक बारहवें आगम में चौदह पूर्व समाविष्ट है। नंदी सूत्रानुसार दृष्टिवाद के पांच विभाग है - 1. परिकर्म 2. सूत्र 3. पूर्वगत 4. अनुयोग 5. चूलिका । तृतीय 'पूर्वगत' विभाग में चौदह पूर्व समाविष्ट है । प्र.34 द्वादशांगी की रचना गणधर भगवंत किसके आधार पर करते है ? उ. तीर्थंकर प्ररुपक त्रिपदी को आधार बनाकर गणधर भगवंत सम्पूर्ण द्वादशांगी की रचना अन्तर्मुहूर्त की अवधि में करते है। .. प्र.35 अंग प्रविष्ट सूत्र (आगम) किसे कहते है ? उ. तीर्थंकर परमात्मा द्वारा उपदिष्ट त्रिपदी के आधार पर गणधर भगवंत जिन - सूत्रों की रचना करते है, उन्हें अंग प्रविष्ट सूत्र कहते है । प्र.36 त्रिपदी से क्या तात्पर्य है ? उ.. उप्पनेइ वा, विगमेइ वा, धुवेइ वा' अर्थात् पदार्थ उत्पन्न होता है, व्यय होता है व ध्रुव-शाश्वत रहता है । . प्र.37 - मातृका पद किसे और क्यों कहते है ? उ. त्रिपदी (उप्पनेइ वा, विगमेइ वा, धुवेइ वा) को मातृका पद कहते है । ++++++++++++++++十十十十十十十十十+++++++++++++++++ चैत्यवंदन भाष्य प्रश्नोत्तरी 13 Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004240
Book TitleChaityavandan Bhashya Prashnottari
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVignanjanashreeji
PublisherJinkantisagarsuri Smarak Trust
Publication Year2013
Total Pages462
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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