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________________ साहु (पु.) (साहु+हुं) = साहुहुं (सप्तमी बहुवचन) सयंभू (पु.) (सयंभू+हुं) = सयंभूहुं (सप्तमी बहुवचन) वारि (नपुं.) (वारि+हुं) = वारिहुं (सप्तमी बहुवचन) महु (नपुं.) (महु+हुं) = महुहुं (सप्तमी बहुवचन) इ-ईकारान्त, उ- ऊकारान्त (पु.) इकारान्त, उकारान्त (नपुं. ) 11. (क) पंचमी एकवचन 5 / 1 (ख) पंचमी बहुवचन 5 / 2 (ग) सप्तमी एकवचन 7/1 अपभ्रंश भाषा में इ-ईकारान्त व उ- ऊकारान्त पुल्लिंग और इकारान्त व उकारान्त नपुंसकलिंग संज्ञा शब्दों के पंचमी विभक्ति एकवचन में 'है', पंचमी विभक्ति बहुवचन में 'हुँ' तथा सप्तमी एकवचन में 'हि' प्रत्यय जोड़ा जाता है। जैसे पंचमी एकवचन 5 / 1 (क) हरि (पु.) (हरि+हे) = हरिहे (पंचमी एकवचन ) गामणी (पु.) ( गामणी + हे) = गामणीहे (पंचमी एकवचन ) साहु (पु.) (साहु+हे) = साहुहे (पंचमी एकवचन) सयंभू (पु.) (सयंभू+हे) = सयंभूहे (पंचमी एकवचन ) वारि (नपुं.) (वारि+हे) = वारिहे (पंचमी एकवचन) महु ( नपुं.) (महु + हे) = महुहे (पंचमी एकवचन ) पंचमी बहुवचन 5/2 (ख) हरि (पु.) (हरि+हुं) = हरिहुं (पंचमी बहुवचन) गामणी (पु.)(गामणी+हुं) = गामणीहुं (पंचमी बहुवचन) साहु (पु.) (साहु+हु) = साहुहुं (पंचमी बहुवचन) अपभ्रंश - हिन्दी-व्याकरण Jain Education International For Personal & Private Use Only (5) www.jainelibrary.org
SR No.004214
Book TitleApbhramsa Hindi Vyakaran
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamalchand Sogani, Shakuntala Jain
PublisherApbhramsa Sahitya Academy
Publication Year2012
Total Pages138
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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