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________________ १८२६ भगवती सूत्र-ग. १० उ. ५ धरणेन्द्र का परिवार देवियों का परिवार है, इत्यादि सारा वर्णन चमरेन्द्र के समान जानना चाहिए, परन्तु बलीन्द्र के बलिचञ्चा राजधानी है । इसका परिवार तृतीय शतक के प्रथम उद्देशक में कहे अनुसार तथा शेष सब वर्णन पूर्ववत् जानना चाहिए, यावत् 'वह मैथुन निमित्तक भोग भोगने में समर्थ नहीं है।' ९ प्रश्न-हे भगवन् ! वैरोचनेन्द्र वैरोचनराज बलि के लोकपाल सोममहाराजा के कितनी अग्रमहिषियाँ हैं ? . ९ उत्तर-हे आर्यो ! चार अग्रमहिषियों हैं । यथा-मेनका, सुभद्रा, विजया और अशनी। इनको एक-एक देवी का परिवार आदि सारा वर्णन चमर के सोम नामक लोकपाल के समान जानना चाहिए। इसी प्रकार यावत् वैश्रमण तक जानना चाहिए। १० प्रश्न-धरणस्स णं भंते ! णागकुमारिंदस्स णागकुमार. रण्णो कइ अग्गमहिसीओ पण्णत्ताओ? १० उत्तर-अजो ! छ अग्गमहिसीओ पण्णत्ताओ, तं जहा१ इला २ सुक्का ३ सतारा ४ स्रोदामिणी ५ इंदा ६ घणविज्जुया । तत्थ णं एगमेगाए देवीए छ छ देवीसहस्सा परिवारो पण्णत्तो। ११ प्रश्न-पभू णं भंते ! ताओ एगमेगा देवी अण्णाई छ छ देविसहस्साइं परिवार विउवित्तए ? | ___११ उत्तर-एवामेव सपुव्वावरेणं छत्तीसाइं देविसहस्साई, सेत्तं तुडिए । (प्र०) पभू णं भंते ! धरणे० ? (उ०) सेसं तं चेव, णवरं Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004089
Book TitleBhagvati Sutra Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhevarchand Banthiya
PublisherAkhil Bharatiya Sudharm Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year2006
Total Pages578
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size10 MB
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