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________________ १६६८ भगवती-ग. ९ उ. ३२ तिर्यच योनिक प्रवेशनक भाणियव्वो, जाव अहवा एगिदिएसु वा, वेइंदिय० जाव पंचिंदिएसु वा होजा। २९ प्रश्न-एयस्स णं भंते ! एगिदियतिरिक्खजोणियपवेसणगस्स, जाव पंचिंदिय-तिरिक्खजोणियपवेसणगस्स य कयरे कयरेहितो जाव विसेसाहिया वा ? .२९ उत्तर-गंगेया ! सव्वत्थोवे पंचिंदियतिरिक्खजोणियपवे. सणए, चरिंदियतिरिक्खजोणियपवेसणएं विसेसाहिए, तेइंदिय० विसेसाहिए, बेइंदिय० विसेसाहिए, एगिदियतिरिक्ख० विसेसाहिए । कठिन शब्दार्थ-उवउंजिऊण-उपयोग लगाकर। ... भावार्थ-२५ प्रश्न-हे भगवन् ! तिर्यंचयोनिक प्रवेशक कितने प्रकार का कहा गया है ? २५ उत्तर-हे गांगेय ! वह पांच प्रकार का कहा गया है । यथा-एकेंद्रिय तिर्यंच-योनिक प्रवेशनक यावत् पंचेन्द्रिय तिर्यंच-योनिक प्रवेशनक। . २६ प्रश्न-हे भगवन् ! एक तिर्यच-योनिक जीव, तिर्यंच-योनिक प्रवेशनक द्वारा प्रवेश करता हुआ क्या एकेद्रियों में उत्पन्न होता है, अथवा यावत् पंचेन्द्रियों में उत्पन्न होता है ? २६ उत्तर-हे गांगेय ! एक तिर्यंच-योनिक जीव, एकेन्द्रियों में उत्पन्न होता है, अथवा यावत् पंचेन्द्रियों में उत्पन्न होता है। २७ प्रश्न-हे भगवन् ! दो तियंच-योनिक जीव, तियंच-योनिक प्रवेशनक द्वारा प्रवेश करते हुए क्या एकेन्द्रियों में उत्पन्न होते हैं, इत्यादि प्रश्न ? .. २७ उत्तर-हे गांगेय ! एकेन्द्रियों में होते हैं अथवा यावत् पंचेन्द्रियों में होते हैं । अथवा एक एकेन्द्रिय में और एक बेइन्द्रिय में होता है । जिस प्रकार Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.004089
Book TitleBhagvati Sutra Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhevarchand Banthiya
PublisherAkhil Bharatiya Sudharm Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year2006
Total Pages578
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size10 MB
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