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________________ मिश्री हो जाओ, अपने आप अगले का नमक गलने लग जाएगा। जीवन में इस तरह की व्यावहारिकता अपना ली जाए, तो कोई समस्या ही न रहे। __पुरुषों में ईगो, अभिमान की बड़ी समस्या रहती है। ऐसा लगता है कि उसके ईगो ने नागाई धार ली है। पुरुष सब कुछ सहन कर लेगा, लेकिन उसके ईगो को ठेस पहुँचेगी, तो बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। पति अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता है, यहाँ तक कि पत्नी के पीछे माँ-बाप से अलग होना तक स्वीकार कर लेता है, लेकिन वह अपनी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं कर पाता। नारी को हमेशा ऐसा व्यवहार करना चाहिए जिससे पुरुष का ईगो संतुष्ट होता रहे। अरे भाई, किसी भी काम से पहले भैरूँजी को राजी करना ज़रूरी होता है, अब ये पतिदेव कौन से भैरूँजी से कम हैं। कहीं ऐसा न हो कि पति के प्रति हमारी उपेक्षा किसी तलाक का, जुदाई का कारण बन जाए। दोनों के बीच कोई खाई खड़ी हो जाए। ___ मैंने सुना है कि नारी बड़ी चतुर होती है, होशियार होती है। किसे बनाना, किसे गिराना उसे खूब आता है । वह सबको बना सकती है लेकिन कई बार पति को नहीं बना पाती। कोशिश तो करती होगी, लेकिन परिणाम यह निकलता है कि नारी और नर में एक दीवार खड़ी हो जाती है। नारी को चाहिए कि वह पति से इस तरह का व्यवहार करे कि उसके सास-ससुर, ननद, देवरानी, जेठानी, देवर, जेठ सभी उस पर गौरव कर सकें। बहुत-सी कहानियाँ सुनते हैं, अमुक घर में बहू क्या आई, घर ही टूट गया। ऐसा करके उसने कोई चतुराई नहीं की। अपने ही पाँवों पर कुल्हाड़ी मार ली। घर तोड़ने से बहू को तो आजादी मिल जाएगी, लेकिन संपूर्ण घर का स्वामित्व, घर का प्यार, कुटुंब का सम्मान नहीं मिल सकेगा। एक बहू या पत्नी होने के नाते उसे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसा व्यवहार करना चाहिए जो पूरे परिवार को एक सूत्र में बाँध कर रख सके। प्रायः देखा गया है कि नारी अपने पति के प्रति नाराज़गी दिखाती रहती है। पति पर शक करती है, संदेह करती है। परिणाम यह निकलता है कि तकरार में ही जीवन बीत जाता है। दोनों को एक-दूसरे पर भरोसा रखना चाहिए। पति की व्यापारिक परेशानियाँ हो सकती हैं। परेशान पति घर आए और यहाँ आते ही उसे जली-कटी सुननी पड़े, तो उसे घर काटने को दौड़ेगा, वह घर में आना कम पसंद करेगा। उसका अधिक समय बाहर बीतने लगेगा। वह बाहर सुख ढूँढ़ेगा। घर में मिली उपेक्षा का परिणाम उसके पूरे परिवार को झेलना पड़ेगा। पति-पत्नी की हालत तो देखो, एक पत्नी ने अपने पति को रात को बारह बजे जगाया और कहा, दूध पी लो। पति चौंका, आज ऐसा क्या हो गया, इतना प्रेम कहाँ से उमड़ आया कि आधी रात को जगाकर दूध पिला रही है। पति ने पूछ ही लिया कि Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003862
Book TitleMrutyu Se Mulakat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandraprabhsagar
PublisherPustak Mahal
Publication Year2011
Total Pages226
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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