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________________ करणानुयोग-प्रवेशिका वर्षको आयु शेष रहती है तो तीसरे भागके लगते ही प्रथम समयसे लेकर अन्तर्मुहत काल पर्यन्त प्रथम अपकर्ष काल होता है। उसमें परभवकी आयुका बन्ध होता है। यदि न बँधे तो उसके भी दो भाग बोतने पर जब नौ वर्षकी आयु शेष रहती है तब अन्तर्मुहर्त के लिये दुसरा अपकर्षकाल आता है । उसमें भी आयु न बँधे तो तीन वर्षकी आयु शेष रहने पर तीसरे अपकर्ष काल में आयु बँधती है। उसमें भो न बँधे तो एक वर्ष आयु शेष रहने पर चौथे अपकर्ष कालमें आयु बँधतो है। इस तरह भुज्यमान आयुका जितना प्रमाण हो उसके त्रिभाग-त्रिभागमें आठ अपकर्ष काल होते हैं। आयुबंधके योग्य परिणाम इन अपकर्ष कालोंमें ही होते हैं किन्तु ऐसा कोई नियम नहीं है कि इन अपकर्षोंमें आयुका बंध होना ही चाहिये। बन्ध होना हो तो होता है, न होना हो तो नहीं होता। ५५६. प्र०-निषेक किसको कहते हैं ? उ०-एक समयमें जितने कर्मपरमाणु उदयमें आयें उनके समूहको निषेक कहते हैं। ५५७. प्र०-अनुभागबन्ध किसको कहते हैं ? उ०-जैसे भाजन वगैरहके निमित्तसे पुष्प वगैरह मदिरा रूप हो जाते हैं, उसमें ऐसो शक्ति हो जाती है कि उसके पोनेसे पुरुषको थोड़ा या बहुत नशा हो आता है। वैसे हो रागादिके निमित्तसे जो पुद्गल कर्मरूप होते हैं उनमें ऐसी शक्ति होती है जिससे उदयकाल आनेपर वे जीवके ज्ञानादि गुणों का थोड़ा या बहुत घात करते हैं। बन्ध होते समय कर्ममें ऐसी शक्तिके पड़ने का नाम हो अनुभागबंध है। ५५८. प्र०-अविभागो प्रतिच्छेद किसको कहते हैं ? उ.-शक्तिके अविभागो अंशको अविभागो प्रतिच्छेद कहते हैं। ५५९. प्र०-वर्ग किसको कहते है ? उ.-अविभागो प्रतिच्छेदोंके समूहको वर्ग कहते हैं। चूंकि प्रत्येक परमाणु में अनेक अविभागो प्रतिच्छेद होते हैं इसलिये प्रत्येक परमाणु एक वर्ग है। ५६०. प्र०-जघन्य वर्ग किसको कहते हैं ? उ०.-थोड़े अनुभाग वाले परमाणुको जघन्य वर्ग कहते हैं। ५६१. प्र०-वर्गणा किसको कहते हैं ? उ.-समान अविभागो प्रतिच्छेदोंसे युक्त वर्गोंके समूहको वर्गणा कहते हैं। ५६२. प्र०-जघन्य वर्गणा किसको कहते हैं ? उ०-जघन्य वर्गों के समूहको जघन्य वर्गणा कहते हैं । Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003835
Book TitleKarnanuyog Praveshika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKailashchandra Shastri
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1987
Total Pages132
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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