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________________ दद्दरमलयसुगंधे य गिण्हंति गिण्हित्ता एगओ मिलायंति मिलाइत्ता जेणेव सामी तेणेव उवागच्छंति उवागच्छित्ता तं महत्थं जाव तित्थयराभिसेयं उवट्ठवेंति । [२४०] तए णं से अच्चुए देविंदे देराया दसहिं सामाणियसाहस्सीहिं तायत्तीसाए तावत्तीसएहिं वक्खारो-५ चउहिं लोगपालेहिं तिहिं परिसाहिं सत्तहिं अणिएहिं सत्तहिं अणियाहिवईहिं चत्तालीसाए आयरक्खदेसाहस्सीहिं सद्धिं संपरिवुडे तेहिं साभाविएहिं वेठव्विएहिं य वरकमल-पइट्ठणेहिं सुरभिवरवारिपडिपुन्नेहिं चंणकयचच्चाएहिं आविद्धकंठेगुणेहिं पउमप्पवपिहाणेहिं करयलपइट्ठणेहिं करयलसूमालपरिग्गहिएहिं अट्ठसहस्सेणं सोवणियाणं कलसाणं जाव अट्ठसहस्सेणं भोमेज्जाणं जाव सव्वोदएहिं सव्वमट्टियाहिं सव्वतुवरेहिं जाव सव्वोसहिसिद्धत्थएहिं सव्विड्ढीए जाव दुंदुहिणिग्धोसनाइयरवेणं महया-महया तित्थयरा भिसेणं अभिसिंचड़ तए णं सामिस्स महया-महया अभिसेयंसि वट्टमाणंसि इंदाइया देवा छत्तचामरकलस-धूवकडुच्छुय-पुप्फगंध जाव हत्थगया हद्वतुट्ठ-चित्तमाणंदिया जाव वज्जसूलपाणी पुरओ चिट्ठति पंजलिउडा एवं विजयाणुसारेणं जाव अप्पेगइया देवा आसिस-संमज्जिओवलित्तं सित्तसुइसम्मट्ठरत्थर-वणवीहियं करेंति जाव गंधवट्टेभूयं अप्पेगइया हिरण्णवासं वासंति एवं सुवण्ण-रयणवइर-आभरण-पत्त-पप्फ-फल-बीय-मल्ल-गंध-वण्ण जाव चण्णावासं वासंति अप्पेगइया हिरण्णविहिं भाएंति एवं जाव चुण्णविहिं भाएंति अप्पेगइया चउव्विहं वज्जं वाएंति तं जहा- ततं विततं धणं झुसिरं अप्पेगइया चउव्विहं गेयं गायंति तं जहा- उक्खित्तं पयंत्तं मंदं रोइंदगं अप्पेगइया चउव्विहं नर्से नच्चंति तं जहाअंचियं दुयं आरभडं भसोलं अप्पेगइया चउव्विहं अभिनयं अभिणंति तं जहा- दिद्वंतियं पाडियंतियं सामण्णओ-विणिवाइयं लोगमज्झावसाणियं अप्पेगइया बत्तीसइविहं दिव्वं नट्टविहिं उवदंसेंति अप्पेगइया उप्पनिवयं निवयउप्पयं संकुचियपसारियं जाव भंतसंभंतं नामं दिव्वं नट्टविहिं उवदंसेंति अप्पेगइया उप्पनिवयं निवयउप्पयं संकुचियपसारियं जाव भंतसंभंतं नामं दिव्वं नट्टविहिं उवदंसेंति अप्पेगइया पीणेति एवं बुक्कारेंति तंडवेंति लासेंति अप्फोडेंति वग्गंति सीहणायं नदंति अप्पेगइया सव्वाइं करेंति अप्पेगइया हयहेसियं एवं हत्थिगुलगुलाइं रहधणधणाइयं अप्पेगइया तिण्णिवि अप्पेगइया उच्छोलेंति अप्पेगइया पच्छोलेंति अप्पेगइया तिवइं छिंदंति अप्पेगइया तिण्णिवि अप्पेगइया पायदद्दरयं करेंति अप्पेगइया हक्कारेंति एवं पुक्कारेंति थक्कारेंति ओवयंति उप्पयंति परिवयंति जलंति तवंति पतवंति गज्जंति विज्जुयायंति वासंति अप्पेगइया देवुक्कलियं करेंति एवं देवकहकरगं करेंति अप्पेगइया दुहुदुहगं करेति अप्पेगइया विकियभूयाई रूवाइं विउव्वित्ता पणच्चंति एवमाइ विभासेज्जा जहा- विजयस्स जाव सव्वओ समंता आधावेंति परिधावेंति । २४१] तए णं से अच्चइंदे सपरिवारे सामि तेणं महया-महया अभिसेएणं अभिसिंचड़ अभिसिंचित्ता करयलपरिग्गहियं सिरसावत्तं मत्थए अंजलिं कट्ट जएणं विजएणं वद्धावेइ वद्धावेत्ता ताहिं इट्ठाहिं जाव जयजयसदं पउंजइ पउंजित्ता जाव पम्हलसूमालाए सुरभीए गंधकासाईए गायाइं लूहेइ लूहेत्ता एवं जाव कप्परुक्खगं पिव अलंकिय-विभूसियं करेइ करेत्ता नट्टविहिं उवदंसेई उवदंसेत्ता अच्छेहि सण्हेहि रययामएहिं अच्छरसातंडुलेहिं भगवओ सामिस्स पुरओ अट्ठमंगलगे आलिहइ [तं जहा]- | [२४२] दप्पण भद्दासण वद्धमाण वरकलस मच्छ सिरिवच्छा । सोत्थिय नंदावत्ता लिहित्ता अट्ठ मंगलगा । दीपरत्नसागर संशोधितः] 195] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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