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________________ पडिवाए राओ बवे करणे भवइ बिइयाए दिवा बालवे करणे भवइ राओ कोलवे करणे भवइ तइयाए दिवा थीविलोयणं करणं भवइ राओ गराइं करणं भवड़ चउत्थीए दिवा वणजे राओ विट्ठी पंचमीए दिवा बवं राओ बालवं छट्ठीए दिवा कोलवं राओ थीविलोयणं सत्तमीए दिवा गराइ राओ वणिजं अट्ठमीए दिवा विट्ठी राओ बवं नवमीए दिवा बालवं राओ कोलवं दसमीए दिवा थीविलोयणं राओ गराइ एक्कारसीए दिवा वणिजं राओ विट्ठी बारसीए दिवा बवं राओ बालवं तेरसीए दिवा कोलवं राओ थीविलोयणं चउद्दसीए दिवा गराइ करणं राओ वणिज पण्णिमाए दिवा विट्ठी करणं राओ बवं करणं भवइ बहलपक्खस्स पडिवाए दिवा बालवं राओ कोलवं बिइयाए दिवा थीविलोयणं राओ गराइ तइयाए दिवा वणिजं राओ विट्ठी चउत्थीए दिवा बवं राओ बालवं पंचमीए दिवा कोलवं राओ थिवीलोयणं छट्ठीए दिवा गराइ राओ वणिज सत्तमीएदिवा विट्ठी राओ बवं अट्ठमीए दिवा बालवं राओ कोलवं नवमीए दिवा थीविलोयणं राओ गराइ दसमीए दिवा वणिजं राओ विट्ठी एक्कारसीए दिवा बवं राओ बालवं बारसीए दिवा कोलवं राओ थीविलोयणं तेरसीए दिवा गराइ राओ वणिजं चउद्दसीए दिवा विट्ठी राओ सउणी अमावसाए दिवा चउप्पयं राओ नागं सुक्कपक्खस्स पडिवाए दिवा किंथग्धं करणं भवइ । [३००] किमाइया णं भंते संवच्छरा किमाइया अयणा विमाइया उऊ किमाइया मासा किमाइया पक्खा किमाइया अहोरत्ता किमाइया मुहुत्ता किमाइया करणा किमाइया नक्खत्ता पन्नत्ता गोयमा चंदाइया संवच्छरा दक्खिणाइया अयणा पाउसाइया उऊ सावणाइया मासा बहुलाइया पक्खा दिवसाइया अहोरत्ता रोदाइया महत्ता बालवाइया करणा अभिजियाइया नक्खत्ता पन्नत्ता समणाउसो पंचसंवच्छरिए णं भंते जुगे केवइया अयणा केवइया उऊ एवं मासा पक्खा अहोरत्ता केवइया मुहुत्ता पन्नत्ता गोयमा पंचसवंच्छरिए णं जुगे दस अयणा तीसं उऊ सट्ठीमासा एगे वीसुत्तरे पक्खसए अट्ठारसतीसा अहोरत्तसया चउप्पन्नं मुहत्तसहस्सा नव य सया पन्नत्ता | वक्खारो-७ [३०१] जोगो देवय तारग्ग गोत्त संठाण चंदरविजोगो । कुल पुण्णिम अवमंसा य सण्णिवाह य नेया य । [३०२] क इ णं भंते नक्खत्ता पन्नत्ता गोयमा अट्ठावीसं नक्खत्ता पन्नत्ता तं जहाअभिई सवणो धणिट्ठा सयभिसया पुव्वभद्दवया उत्तरभद्दवया रेवई अस्सिणी भरणी कत्तिया रोहिणी मियसिरं अद्दा पुणव्वसू पूसो अस्सेसा मघा पुव्वफग्गुणी उत्तरफग्गुणी हत्थो चित्ता साइ विसाहा अनुराहा जेट्ठा मूलं पुव्वासाढा उत्तरासाढा | [३०३] एएसि णं भंते अट्ठावीसाए नक्खत्ताणं कयरे नक्खत्ता जे णं सया चंदस्स दाहिणेणं जोयं जोएंति कयरे नक्खत्ता जे णं सया चंदस्स उत्तरेणजोयं जोएंति कयरे नक्खत्ता जे णं चंदस्स दाहिणेणवि उत्तरेणवि पमबंपि जोगं जोएंति कयरे नक्खत्ता जे णं चंदस्स दाहिणेणवि पमइंपि जोयं जोएंति कयरे नक्खत्ता जे णं सया चंदस्स पमदं जोयं जोएंति गोयमा एएसि णं अट्ठावीसाए नक्खत्ताणं तत्थ णं जेते नक्खत्ता जे णं सया चंदस्स दाहिणेणं जोयं जोएंति ते णं छ । [३०४] संठाण अद्द पुरसो सिलेस हत्थो तहेव मूलो य । बाहिरओ बाहिरमंडलस्स छप्पेते नक्खत्ता । [३०५] तत्थ णं जेते नक्खत्ता जे णं सया चंदस्स उत्तरेणं जोगं जोएंति ते णं बारस तं जहा- अभिई सवणो धणिट्ठा सयभिसया पुव्वभद्दवया उत्तरभद्दवया रेवई अस्सिणी भरणी पुव्वफग्गुणी [दीपरत्नसागर संशोधितः] [111] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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