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________________ [२८९] एगमेगस्स णं भंते मासस्स कइ पक्खा पन्नत्ता गोयमा दो पक्खा पन्नत्ता तं जहा- बहुलपक्खे य सुक्कपक्खे य एगमेगस्स णं भंते पक्खस्स कइ दिवसा पन्नत्ता गोयमा पन्नरस दिवसा पन्नत्ता तं जहा- पडिवादिवसे बिइयादिवसे जाव पन्नरसीदिवसे, एएसि णं भंते पन्नरसण्हं दिवसाणं कइ नामधेज्जा पन्नत्ता गोयमा पन्नरस नामधेज्जा पन्नत्ता [तं जहा]- | पूव्वंगे सिद्धमनोरमे य तत्तो मनोहरे चेव । जसभद्दे य जसधरे छठे सव्वकामसमिद्धे य । [२९१] इंदमुद्धाभिसित्ते य सोमणस धणंजए य बोद्धव्वे । अत्थसिद्ध अभिजाए अच्चसणे सयंजए चेव । [२९२] अग्गिवेसे उवसमे दिवसाणं होंति नामधज्जाइं, एएसि णं भंते पन्नरसण्हं दिवसाणं कइ तिही पन्नत्ता गोयमा पन्नरस तिही पन्नत्ता तं जहा- नंदे भद्दे जए तुच्छे पुन्ने पक्खस्स पंचमी पुणरवि नंदे भद्दे जए तुच्छे पुन्ने पक्खस्स दसमी पुणरवि-नंदे भद्दे जए तुच्छे पुन्ने पक्खस्स पन्नरसी एवं एते तिगुणा तिहीओ सव्वेसिं दिवसाणं एगमेगस्स णं भंते पक्खस्स कई राईओ पन्नत्ताओ गोयमा पन्नरस राईओ पन्नत्ताओ तं जहा- पडिवाराई जाव पन्नरसीराई एयासि णं भंते पन्नरसण्हं राईणं कइ नामधेज्जा पन्नत्ता गोयमा पन्नरस नामधेज्जा पन्नत्ता [तं जहा]- | [२९३] उत्तमा य सुनक्खत्ता एलावच्चा जसोहरा । सोमणसा चेव तहा सिरिसंभया य बोद्धव्वा । [२९४] विजया य वेजयंति जयंति अपराजिया य इच्छा य । समाहारा चेव तहा तेया य तहेव अइतेया । [२९५] देवानंदा निरई रयणीणं नामधेज्जाइं, एयासि णं भंते पन्नरसण्हं राईणं कइ तिही वक्खारो-७ पन्नत्ता गोयमा पन्नरस तिही पन्नत्ता तं जहा- उग्गवई भोगवई जसवई सव्वसिद्धा सुहाणामा पुणरविउग्गवई भोगवई जसवई सव्वसिद्धा सुहाणामा पुणरवि-उग्गवई भोगवई जसवई सव्वसिद्धा सुहणामा एवं एए तिगुणा तिहीओ सव्वेसिं राईणं एगमेगस्स णं भंते अहोरत्तस्स कइ मुहुत्ता पन्नत्ता गोयमा तीसं मुहुत्ता पन्नत्ता [तं जहा]- | [२९६] रोद्दे सेए मित्ते वाउ सुपीए तहेव अभिचंदे । माहिंद बलव बंभे बहसच्चे चेव ईसाणे । [२९७] तढे य भावियप्पा वेसमणे वारुणे य आणंदे । विजए य वीससेणे पायावच्चे उवसमे य । [२९८] गंधवा अग्गिवेसे सयवसहे आयवं य अममे य । अणवं भोमे च रिसेहे सव्वद्वे रक्खसे चेव । [२९९] कई णं भंते करणा पन्नत्ता गोयमा एक्कारस करणा पन्नत्ता तं जहा- बवं बालवं कोलवं थीविलोयणं गराइ वणिजं विट्ठी सउणी चउप्पयं नागं किंथग्धं एएसि णं भंते एक्कारसण्हं करणाणं कइ करणा चरा कइ करणा थिरा० सत्त करणा चरा चत्तारि करणा थिरा पन्नत्ता तं जहा- बवं बालवं कोलवं थीविलोयणं गराइ वणिजं विट्ठी-एए णं सत्त करणा चरा चत्तारि करणा थिरा० सउणी चउप्पयं नागं किंथग्धं-एए णं चत्तारि करणा थिरा, एए णं भंते चरा थिरा वा कया भवंति गोयमा सुक्कपक्खस्स [दीपरत्नसागर संशोधितः] [110] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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