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________________ [२५३] सव्वब्भंतराओ णं भंते सूरमंडलाओ केवइयं अबाहाए सव्वाबाहिरए सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा पंचदसुत्तरे जोयणसए अबाहाए सव्वबाहिरए सूरमंडले पन्नत्ते । [२५४] सूरमंडलस्स णं भंते सूरमंडलस्स य केवइयं अबाहाए अंतरे पन्नत्ते गोयमा दो-दो जोयणाई अबाहाए अंतरे पन्नत्ते ।। [२५५] सूरमंडले णं भंते केवइयं आयाम-विक्खंभेणं केवइयं परिक्खेवेणं केवइयं बाहल्लेणं पन्नत्ते गोयमा अडयालीसं एगसद्विभाए जोयणस्स आयाम-विक्खंभेणं सविसेसं परिक्खेवेणं चठवीसं एगसट्ठियाए जोयणस्स बाहल्लेणं पन्नत्ते । [२५६] जंबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए सव्वब्भंतरे सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा चोयालीसं जोयणसहस्साइं अट्ठ य वीसे जोयणसए अबाहाए सव्वब्भंतरे सूरमंडले पन्नत्ते जंबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए अब्भंतराणंतरे सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा चोयालीसं वक्खारो-७ जोयणसहस्साइं अट्ठ य बावीसे जोयणसए अडयालीसं च एगसहिभागे जोयणस्स अबाहाए अब्भतराणंतरे सूरमंडले पन्नत्ते जंबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए अब्भंतरतच्चे सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा चोयालीसं जोयणसहस्साइं अट्ठ य पणवीसे जोयणसए पणतीसं च एगसट्ठिभागे जोयणस्स अबाहा अब्भंतरतच्चे सूरमंडले पन्नत्ते एवं खल एएणं उवाणं निक्खममाणे सूरिए तयणंतराओ मंडलाओ तयणंतरं मंडलं संकममाणे-संकममाणे दो-दो जोयणाई अडयालीसं च एगसद्विभाए जोयणस्स एगमेगे मंडले अबाहावुढिं अभिवड्ढेमाणे-अभिवड्ढेमाणे सव्वबाहिरं मंडलं उवसंकमित्ता चारं चरइ जबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए सव्वबाहिरे सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा पणयालीसं जोयणसहस्साई तिण्णि य तीसे जोयणसए अबाहाए सव्वबाहिरे सूरमंडले पन्नत्ते जंबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए बाहिराणंतरे सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा पणयालीसं जोयणसहस्साइं तिण्णि य सत्तावीसे जोयणसए तेरस य एगसहिभाए जोयणस्स अबाहाए बाहिराणंतरे सूरमंडले पन्नत्ते जंबुद्दीवे णं भंते दीवे मंदरस्स पव्वयस्स केवइयं अबाहाए बाहिरतच्चे सूरमंडले पन्नत्ते गोयमा पणयालीसं जोयणसहस्साइं तिण्णि य चउवीसे जोयणसए छव्वीसं च एगसट्ठिभाए जोयणस्स अबाहाए बाहिरतच्चे सूरमंडले पन्नत्ते एवं खलु एएणं उवाएणं पविसमाणे सूरिए तयणंतराओ मंडलाओ तयणंतरं मंडलं संकममाणे-संकममाणे दो-दो जोयणाई अडयालीसं च एगसद्विभाए जोयणस्स अबाहाए बाहिरतच्चे सूरमंडले पन्नत्ते एवं खलु एएणं उवाएणं पविसमाणे सूरिए तयणंतराओ मंडलाओ तयणंतरं मंडलं संकममाणे-संकममाणे दो-दो जोयणाई अडयालीसं च एगसद्विभाए जोयणस्स एगमेगे मंडले अबाहावुदि निवड्ढेमाणे-निवड्ढेमाणे सब्भंतरं मंडलं उवसंकमित्ता चारं चरइ । _[२५७] जंबुद्दीवे दीवे सव्वब्भंतरे णं भंते सूरमंडले केवइयं आयाम-विक्खंभेणं केवइयं परिक्खेवेणं पन्नत्ते गोयमा नवणउइं जोयणसहस्साई छच्च चत्ताले जोयणसए आयाम-विक्खंभेणं तिण्णि य जोयणसयसहस्साइं पन्नरस य जोयणसहस्साइं एगूणणउइं च जोयणाइं किंचिविसेसाहियाइं परिक्खेवेणं अब्भंतराणंतरे णं भंते सूरमंडले केवइयं आयाम-विक्खंभेणं केवइयं परिक्खेवेणं पन्नत्ते गोयमा नवणउई जोयणसहस्साइं छच्च पणयाले जोयणसए पणतीसं च एगसद्विभाए जोयणस्स आयाम-विक्खंभेमं तिण्णि य जोयणसयसहस्साइं पन्नरस य जोयणसहस्साइं एगं च सत्तुत्तरं जोयणसयं परिक्खेवेणं पन्नत्ते [दीपरत्नसागर संशोधितः] [100] [१८-जंबूद्दीवपन्नत्ति]
SR No.003735
Book TitleAgam 18 Jambudivpannatti Sattam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages122
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 18, & agam_jambudwipapragnapti
File Size2 MB
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