________________
सम्मुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं सम्मुच्छिममणुस्साण य एवं चेव, गब्भवक्कंतियचंदियतिरिक्खजोणियाणं गब्भवक्कंतियमणुस्साण य नो संवुडाजोणी नो विडयाजोणी संवुडवियडाजोणी, वाणमंतर-जोइसिय-वेमाणियाणं जहा- नेरइयाणं, एतेसि णं भंते जीवाणं संवुडजोणियाणं वियडजोणियाणं संवुडवियजोणियाणं अजोणियाणं यकतरे कतरेहितो अप्पा वा बया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा जीवा संवुडवियडजोणिया, वियडजोणिया असंखेज्जगुणा अजोणिया अनंतगुणा, संवुडजोणिया अनंतगुणा ।
[३६०] कतिविहा णं भंते जोणी पन्नत्ता गोयमा तिविहा०-कुम्मुण्णया संखावत्ता वंसीपत्ता, कुम्मुण्णया णं जोणी उत्तमपुरिसमाऊणं कुम्मण्णयाए णं जोणीए उत्तमपरिसा गब्भेवक्कमंति तं जहा- अरहंता चक्कवट्टी बलदेवा वासुदेवा, संखावत्ता पंजोणीइत्थिरयणस्स संखावत्ताए णं जोणीए बहवेजीवा य पोग्गला य वक्कंमति विक्कमंति पयंति उवचयंति नो चेव णं निप्फज्जंति वंसीपत्ता णं जोणी पिहुजणस्स वंसीपत्ताए णं जोणीए पिहुजणा गब्भे वक्कमति । मुनि दीपरत्नसागरेण संसोधितः संपादितश्च नवमं पयं समत्तं
॥ दसमं चरिमपयं [] [३६१] कति णं भंते पुढवीओ पन्नत्ताओ गोयमा अट्ठ पुढवीओ पन्नत्ताओ तं जहारयणप्पभा सक्करप्पभा वालुयप्पभा पंकप्पभा तमप्पभा तमतमप्पभा ईसीपब्भारा, इमा णं भंते रयणप्पभा पढवी किं चरिमा अचरिमा चरिमाइं अचरिमाइं चरिमंतपदेसा अचरिमंतपदेसा गोयमा इमा णं रयणप्पभा पुढवी नो चरिमा नो अचरिमा नो चरिमाइं नोअचरिमाइं नो चरिमंतपदेसा नो अचरिमंतपदेसा नियमा अचरिमं च चरिमाणि य चरिमंतपदेसा य अचरिमंतपएसा य एवं जाव अहेसत्तमा पढवी सोहम्मादी जाव अनुत्तरविमाणा एवं चेव ईसीपब्भारा वि एवं चेव लोगे वि एवं चेव एवं अलोगे वि ।
[३६२] इमीसे णं भंते रयणप्पभाए पुढवीए अचरिमस्स य चरिमाण य चरिमंतपएसाण य अचरिमंतपएसाण य दव्वट्ठयाए पएसद्वाए दव्वट्ठ-पएसट्टयाए कतरे कतरेहिंतो अप्पा वा बहया वा तल्ला वा विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवे इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए दव्वट्ठयाए एगे अचरिमे चरिमाइं असंखेज्जगुणाई अचरिमं च चरिमाणि य दो वि विसेसाहियाई, पदेसट्ठयाए सव्वत्थोवा इमीसे रयणप्पभाए पढवीए चरिमंतपदेसा अचरिमंतपएसाअसंखेज्जगणा चरिमंतपएसा य अचरिमंतपएसा य दो वि विसेसाहिया, दव्वट्ठ-पदेसट्ठयाए सव्वत्थोवा इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए दव्वट्ठयाए एगेअचरिमे, पय-१०
चरिमाइंअसंखेज्जगुणनाइं अचरिमं च चरिमाणि य दो वि विसेसाहियाई चरिमंतपएसा असंखेज्जगुणा अचरिमंतपएसा असंखेज्जगुणा चरिमंतपएसा य अचरिमंतपएसा य दो वि विसेसाहिया, एवं जाव अहेसत्तमा सोहम्मस्स जाव लोगस्स य एवं चेव ।
_ [३६३] अलोगस्स णं भंते अचरिमस्स य चरिमाण य चरिमंतपएसाण य अचरिमंतपएसाण य दव्वट्ठयाए पदेसट्ठयाए दव्वट्ठ-पदेसट्ठयाए कतरे कतरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवे अलोगस्स दव्वट्ठयाए एगेअचरिमे, चरिमाइं असंखेज्जगुणाई अचरिमं च चरिमाणिय दो वि विसेसाहियाइं, पदेसट्टयाए सव्वत्थोवा अलोगस्स चरिमंतपदेसा, अचरिमंतपदेसा अनंतगुणा चरिमंतपदेसा य अचरिमंतपदेसा य दो वि विसेसाहिया दव्वट्ठ-पदेसट्ठयाए सव्वत्थोवे अलोगस्स दव्वट्ठयाए एगे अचरिमे,
दीपरत्नसागर संशोधितः]
[93]
[१५-पन्नवणा]