SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 191
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ [५८७] नेरइयाणं भंते आहारे किं आभोगणिव्वत्तिए अणाभोगणिव्वत्तिए गोयमा आभोगणिव्वत्तिए वि अणाभोगणिव्वत्तिए वि एवं असुरकुमाराणं जाव वेमाणियाणं नवरं-एगिंदियाणं नो आभोगणिव्वत्तिए अणाभोगणिव्वत्तिए नेरइया णं भंते जे पोग्गले आहारत्ताए गेण्हति ते किं जाणंति पासंति आहारेंति उदाहं न जाणंति न पासंति आहारेति गोयमा न जाणंति न पासंति आहारेंति एवं जाव तेइंदिया चरिंदियाणं पुच्छा गोयमा अत्थेगइया न जाणंति पासंति आहारेंति अत्थेगइया न जाणंति न पासंति आहारेंति पंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं पच्छा गोयमा अत्थेगइया जाणंति पासंति आहारेंति अत्थेगइया जाणंति न पासंति आहारेति अत्थेगइया न जाणंति पासंति आहारेंति अत्थेगइया न जाणंति न पासंति आहारेंति एवं मणूसाण वि वाणमंतर-जोतिसिया जहा- नेरइया वेमाणियाणं पुच्छा गोयमा अत्थेगइया जाणंति पासंति आहारेंति अत्थेगइया न जाणंति न पासंति आहारेंति से केणद्वेणं भंते एवं वुच्चति० गोयमा वेमाणिया दुविहा पन्नत्ता तं जहामाइमिच्छद्दिट्ठीउववण्णगा य अमाइसम्मद्दिट्ठिउववण्णगा य [तत्थ णं जेते माइमिच्छद्दिहिउववन्नगा ते णं न जाणंति न पासंति आहारेति तत्थ णं जेते माइमिच्छद्दिहिउववन्नगा ते णं न जाणंति न पासंति आहारेंति तत्थ णं जेते अमाइसम्मदिहि-उववन्नगा ते दुविहा पन्नत्ता तं जहा- अनंतरोववण्णा य परंपरोववण्णगा य तत्थ णं जेते अनंतरोववण्णगा ते णं न जाणंति न पासंति आहारेंति तत्थ णं जेते परंपरोववण्णगा ते दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य तत्थ णं जेते अपज्जत्तगा ते णं न जाणंति न पासंति आहारेंति तत्थ णं जेते पज्जत्तगा ते दुविहा पन्नत्ता तं जहा- उवउत्ता य अनुवउत्ता य तत्थ णं जेते अनुवउत्ता ते णं न जाणंति न पासंति आहारेंति तत्थ णं जेते उवउत्ता ते णं जाणंति पासंति आहारेंति] से तेणटेणं गोयमा एवं वुच्चति-अत्थेगइया जाणंति पासंति आहारेंति अत्थेगइया न जाणंति न पासंति आहारेंति _नेरइयाणं भंते असंखेज्जा अज्झवसाणा पन्नत्ता ते णं भते कि पसत्था अप पसत्था वि अप्पसत्था वि एवं जाव वेमाणियाणं नेरइयाणं णं भंते किं सम्मत्ताभिगमी मिच्छत्ताभिगमी सम्मामिच्छत्ताभिगामी गोयमा सम्मत्ताभिगमी वि मिच्छत्ताभिगामी वि सम्मामिच्छत्ताभिमगी वि एवं जाव वेमाणिया नवरं-एगिंदिय-विगलिंदिया नो सम्मत्ताभिगमी मिच्छत्ताभिगमी नो सम्ममिच्छत्ताभिगमी पय-३४ [५८८] देवा णं भंते किं सदेवीया सपरियारा सदेवीया अपरियारा अदेवीया सपरियारा अदेवीया अपरियारा गोयमा अत्थेगइया देवा सदेवीया सपरियारा अत्थेगिइया देवा अदेवीया सपरियारा अत्थेगइया देवा अदेवीया अपरियारा नो चेव णं देवा सदेवीया अपरियारा से केणटेणं भंते ए अत्थेगइया देवा सदेवीया सपरियारा अत्थेगइया देवा अदेवीया सपरियारा तं चेव जावनो चेव णं देवा सदेवीया सपरियारा गोयमा भवणवति जाव सोहम्मीसाणेसुकप्पेसु देवा सदेवीया सपरिवारा सणंकुमारमाहिंद-बंभलोग-लंतग-महासुक्क-सहस्सार-आणय-पाणयआरण-अच्चुएसु कप्पेसु देवा अदेवीया सपरियारा गेवेज्जणुत्तरोववाइयदेवा अदेवीया अपरियारा नो चेव णं देवा सदेवीया अपरियारा से तेणटेणं गोयमा एवं वुच्चति-अत्थेगइया देवा सदेवीया सपरियारा तं चेव जाव नो चेव णं देवा सदेवीया अपरियारा | [५८९] कतिविहा णं भंते परियारणा पन्नत्ता गोयमा पंचविहा परियारणा पन्नत्ता तं जहाकायपरियारणा फासपरियारणा रूवपरियारणा सद्दपरियारणा मणपरियारणा से केणटेणं भंते एवं वुच्चति० दीपरत्नसागर संशोधितः] [190] [१५-पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy