SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 190
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जतिभागं उक्कोसेणं अहेसत्तमाए पुढवीए हेट्ठिल्ले चरिमंते तिरियं जाव असंखेज्जे दीव-समुद्दे उड्ढं जाव सगाई विमाणाइं ओहिणा जाणंति पासंति अनुत्तरोववाइयदेवा णं भंते वतियं खेत्तं ओहिणा जाणंति पासंति संभिन्नं लोगनालिं ओहिणा जाणंति पासंति । [५८२] नेरइयाणं भंते ओही किंसठिए पन्नत्ते गोयमा तप्पागारसंठिए पन्नत्ते असुरकुमाराणं पुच्छा गोयमा पल्लगसंठिए एवं जाव थणियकुमाराणं पंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा गोयमा नानासंठाणसंठिए पन्नत्ते एवं मणूसाण वि वाणमंतराणं पुच्छा गोयमा पडहसंठाणसंठिए पन्नत्ते जोतिसियाणं पुच्छा गोयमा झल्लरिसंठाणसंठिए पन्नत्ते सोहम्मगदेवाणं पुच्छा गोयमा उद्धमुइंगागारसंठि पन्नत्ते एवं जाव अच्चुयदेवाणं पुच्छा, गेवेज्जगदेवाणं पुच्छा गोयमा पुप्फचंदेरिसंठिए पन्नत्ते अनुत्तरोववाइयाणं पुच्छा गोयमा जवनालियासंठिए ओही पन्नत्ते । [ ५८३] नेरइया णं भंते ओहिस्स किं अंतो बाहिं गोयमा अंतो नो बाहिं एवं जाव थणियकुमारा पंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा गोयमा नो अंतो बाहिं मणूसाणं पुच्छा गोयमा अंतो वि बाहिं पि वाणमंतर- जोइसिय-वेमाणियाणं जहा- नेरइयाणं नेरइया णं भंते किं देसोही सव्वोही गोयमा देसोही नो सव्वोही एवं जाव थणियकुमाराणं पंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा गोयमा देसोही नो व मणूसाणं पुच्छा गोयमा देसोही वि सव्वोही वि वाणमंतर - जोतिसिय-वेमाणियाणं जहा- नेरइयाणं, नेरइयाणं भंते ओहि किं आणुगामिए वड्ढमाणए हायमाणए पडिवाई अपडिवाई अवट्ठिए अणवट्ठिए गोयमा आणुगामिए नो अणाणुगामिए नो वड्ढमाणए नो हायमाणए नो पडिवाई अपडिवाई अवट्ठिए नो अणवट्ठिए एवं जाव थणियकुमाराणं पंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा गोयमा आणुगामिए वि जाव अणवट्ठिए वि एवं मणूसाणं वि वाणमंतर - जोतिसिय-वेमाणियाणं जहा- नेरइयाणं । मुनि दीपरत्नसागरेण संसोधितः संपादितश्च तेत्तीसइमं पयं समत्तं [] चउतीसइमं पवियारणा पयं I [५८४] अनंतरागयाहारे आहारभोयणाइ य पोग्गला नेव जाणंति अज्झवसाणा य आहिया । पय-३४ सम्मत्तस्स अभिगमे तत्तो परियारणा य बोद्धव्वा । काए फासे रूवे सद्दे य मणे य अप्पबहुं || [५८६ ] नेरइया णं भंते अनंतराहारा तओ निव्वत्तणया ततो परियाइणया ततो परिणामणया ततो परियारणया ततो पच्छा विउव्वाणया हंता गोयमा नेरइया णं अनंतकाराहारा तओ निव्तवत्णया ततो परियाइयणया तओ परिणामणया तओ परियाणरणया तओ पच्छा विउव्वणया असुरकुमारा णं भंते अनंतराहा तओ निव्वत्तणया तओ परियाअयणया तओ परिणामणया ओ विउव्वणया तओ पच्छा परियारणया हंता गोयमा असुरकुमारा अनंतराहारा तओ निव्वत्तणया जा पच्छा परियारणया एवं जाव थणियकुमारा पुढविक्कइया णं भंते अनंतराहारा तओ निव्वत्तणया परियाइयणया तओ परिणामणया तओ परियारणया ततओ विउव्वणया हंता गोयमा तं चेव जाव परियारणया नो चेव णं विउव्वणया एवं जाव चउरिंदिया नवरं वाउक्काइया पंचेंदियतिरिक्खजोणिया मणुस्सा य जहा- नेरइया वाणमंतर - जोतिसिय-वेमाणिया जहा- असुरकुमारा । [दीपरत्नसागर संशोधितः ] [५८५] [189] [१५- पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy