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________________ जीवेगिंदिया सत्तविहबंधगा वि अट्ठविहबंधगा वि जीवे णं भंते आउयं कम्मं बंधमाणे पुच्छा गोयमा नियमा अट्ठ एवं नेरइए जाव वेमाणिए एवं पुहत्तेण वि नाम-गोय-अंतराय बंधमाणे जीव कति कम्मपगडीओ बंधंति गोयमा जाओ नाणावरणिज्जं बंधमाणे बंधइ ताहिं भाणियव्वो एवं नेरइए वि जाव वेमाणिए एवं पुहत्तेणं वि भाणियव्वं । मुनि दीपरत्नसागरेण संसोधितः संपादितश्च चोवीसइमं पयं समत्तं ॥ पंचवीसइम-कम्मबंधवेय पयं । [५४७] कति णं भंते कम्मपगडीओ पन्नत्ताओ गोयमा अट्ठ कम्मपगडीओ पन्नत्ताओ तं जहा- नाणावरणिज्जं जाव अंतराइयं एवं नेरइयाणं जाव वेमाणियाणं जीवे णं भंते नाणावरणिज्जं कम्म बंधमाणे कति कम्मपगडीओ वेदेति गोयमा नियमा अट्ठ कम्मपगडीओ वेदेति एवं नेरइए जाव वेमाणिए एवं पहत्तेण वि एवं वेयणिज्जवज्जं जाव अंतराइयं जीवे णं भंते वेयणिज्जं कम्मं बंधमाणे कड़ कम्मपगडीओ वेदेइ गोयमा सत्तविहवेयए वा अट्ठविहवेयए वा चउव्विहवेयए वा एवं मणूसे वि सेसा पय-२५ नेरइयाई एगत्तेण वि पुहत्तेण वि नियमा अट्ट कम्मपगडीओ वेदेति जाव वेमाणिया, जीवा णं भंते वेदणिज्जं कम्मं बंधमाणा कति कम्मपगडीओ वेदेति गोयमा सव्वे वि ताव होज्जा अट्ठविहवेदगा य चउव्विहवेदगा य अहवा अट्ठविहवेदगा य चउव्विहवेदगा य सत्तविहवेदगे य अहवा अट्ठविहवेदगा य चउव्विहवेदगा य सत्तविहवेदगा य एवं मणूसा वि भाणियव्वा । मुनि दीपरत्नसागरेण संसोधितः संपादितश्च पंचवीसइमं पयं समत्तं ॥ छव्वीसइम-कम्मवेयबंध पयं ॥ [५४८] कति णं भंते कम्मपगडीओ पन्नत्ताओ गोयमा अट्ठ कम्मपगडीओ पन्नत्ताओ तं जहा- नाणावरणिज्जं जाव अंतराइयं एवं नेरइयाणं जाव वेमाणियाणं जीवे णं भंते नाणावरणिज्जं कम्म वेदेमाणे कति कम्मपगडीओ बंधंति गोयमा सत्तविहबंधए वा अट्ठविहबंधए वा छव्विहबंधए वा एगविहबंधए वा नेरइए णं पुच्छा गोयमा सत्तविहबंधए वा अट्ठविहबंधए वा एवं जाव वेमाणिए मणूसे जहा- जीवे जीवा णं पुच्छा गोयमा सव्वे वि ताव होज्जा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य छव्विहबंधए य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य छव्विहबंधगा य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य एगविहबंधगे य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य एगविहबंधगा य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठवि-हबंधगा य छव्विहबंधए य एगविहबंधए य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य छव्विहबंधए य एगविहबंधगा य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य छव्विहबंधगा य एगविहबंधए य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य छव्विहबंधगा य एगविहबंधगा य एवं एते नव भंगा अवसेसाणं एगिदिय-मणूसवज्जाणं तियभंगो जाव वेमाणियाणं एगिंदिया णं सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य, मणसाणं पृच्छा गोयमा सव्वे ति ताव होज्जा सत्तविहबंधगा अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगे य अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधगा य अहवा सत्तविहबंधगा य छव्विहबंधए य एवं छव्विहबंधएण वि समं दो भंगा एगविहबंधएण वि समं दो भंगा अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधए य छव्विहबंधए य चउभंगो अहवा सत्तविहबंधगा य अट्ठविहबंधए य चउभंगो अहवा सत्तविहबंधगा य दीपरत्नसागर संशोधितः] [175] [१५-पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
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