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________________ फुडे, जंबुद्दीवेणं भंते दीवे किणा फुडे कतिहिं वा काएहिं फुडे-किंधम्मत्थिकाएणं जाव आगासत्थिकाएणं फुडे गोयमा नो धम्मत्थिकाएणं फुडे धम्मत्थिकायस्स देसेणं फुडे धम्मत्थिकायस्स पएसेहिं फुड़े एवं अधम्मत्थिकायस्स वि आगासत्थिकायस्स वि पुढविकाइएणं फुडे जाव वणप्फइकाएणं फुडे, तसकाएणं पय-१५ सिय फुडे सिय नो फुडे अद्धासमएणं फुडे, एवं लवणसमुद्दे घायइसंडेदीवे कालोएसमुद्दे अन्भितरपुक्खरद्धे बाहिरपुक्खरद्धे एवं चेव नवरंअद्धारसमएणंनो फुडे सयंभुरमणे समुद्दे एसा परिवाडीइमाहिंगाहाहिं । [४२९] जंबुद्दीवे लवणे धायइ कालोय पुक्खरे वरुणे । खीर घत खोत नंदि य अरुणवरे कुंडले रुयए । [४३०] आभरण-वत्थ-गंध उप्पल-तिलए य पढवि-निहि-रयणे । वासहर-दह-नदीओ विजया वक्खार-कप्पिंदा । [४३१] करु-मंदर-आवासा कडा नक्खत्त-चंद-सरा य । देवे नागे जक्खे भूए य सयंभुरमणे य । [४३२] एवं जहा- बाहिरपुक्खरद्धे भणितं तहा जाव सयंभुरमणे समुद्दे जाव अद्धासमएणं नोफुड़े लोगे णं भंते किणा फुडे कतिहिं वा काएहिं पुच्छा गोयमा नो धम्मत्थिकारणं फुडे जाव नो आगासत्थिकाएणं फुडे आगासत्थिकायस्स देसेणं फुडे आगासत्थिकायस्स पदेसेहिं फुडे नो पुढविक्काइएणं फुडे जाव नो अद्धासमएणं फुडे एगे अजीवदव्वदेसे अगरुलहुए अनंतेहिं अगरुलहुयगुणेहिं संजुत्ते सव्वागास अनंतभागूणे । . पनरसमे पये-पढमो उहेसो समत्तो . । बीओ उद्देसो । [४३३] इंदिय-उवचय निव्वत्तणा य समया भवे असंखेज्जा । लद्धी उवओगद्धा अप्पाबहए विसेसाहिया । [४३४] ओगाहणा अवाए ईहा तह वंजणोग्गहे चेव । दव्विंदिय भाविंदिय तीया बद्धा रेक्खडिया । [४३५] कतिविहे गं भंते इंदिओवचए पन्नत्ते गोयमा पंचविहे इंदिओवचए पन्नत्ते तं जहासोइंदिओवचए चक्खिंदिओवचए घाणिंदिओवचए जिब्भिंदिओवचए फासिंदिओवचए नेरइयाणं भंते पुच्छा गोयमा पंचविहे इंदिओवचए पन्नत्ते तं जहा- सोइंदिओवचए जाव फासिंदिओवचए एवं जाव वेमाणियाणं जस्स जइ इंदिया तस्स तइविहो चेव इंदिओवचयो भाणियव्वो, कतिविहा णं भंते इंदियनिव्वत्तणा पत्ता गोयमा पंचविहा इंदियनिव्वत्तणा प० सोइंदियनिव्वत्तणा जाव फासिंदियनिव्वत्तणा एवं नेरइयाणं जाव वेमाणियाणं नवरं-जस्स जतिंदिया अत्थि, सोइंदियनिव्वत्तणा णं भंते कतिसमइया पन्नत्ता गोयमा असंखिजज्समइया अंतोमुहत्तिया पन्नत्ता एवं जाव फासिंदियनिव्वत्तणा एवं नेरइयाणं जाव वेमाणियाणं, कतिविहा णं भंते इंदियलद्धी पन्नत्ता गोयमा पंचविहा इंदियलद्धी प० सोइंदियलद्धी जाव फासिंदियलद्धी एवं नेरइयाणं जाव वेमाणियाणं नवरं-जस्स जति इंदिया अत्थि तस्स तावतिया लद्धी भाणियव्वा, कतिविहा णं भंते इंदियउवओगद्धा पन्नत्ता गोयमा पंचविहा इंदियउवओगद्धा पन्नत्ता तं जहा दीपरत्नसागर संशोधितः] [114] [१५-पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
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